13 नवंबर 2012 - 20:30

इस बयान के अंत में दुनिया भर के आज़ाद इंसानों, मुसलमानों और ख़ास कर उल्मा और अहलेबैत (अ.ह) का अनुसरण करने वालों से मांग की गई है कि वह इस खुले हुए अन्नयाय के विरूद्ध आवाज़ बुलंद करें और बहरैनी जनता का समर्थन करें।

अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार बहरैनी जनता पर आले ख़लीफ़ा के लगातार जारी अत्याचारों के विरोध में कि जिसमें हालिया 31 लोगों की नागरिकता रद्द किया जाना और आयतुल्लाह शेख़ ईसा क़ासिम को तरह तरह की धमकियां देना भी शामिल है, विश्व अहलेबैत परिषद ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। इस बयान में पिछले दो सालों से लगातार निहत्थे बहरैनी लोगों के नरसंहार, अपहरण, गिरफ़्तारियों और उन्हें तरह तरह की यातनाएं दिये जाने की ओर इशारा करते हुए बहरैनी अधिकारियों की उपरोक्त दोनों ग़ैरक़ानूनी और ग़ैरदीनी कार्यवाहियों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए ख़ेद प्रकट किया गया है।इस बयान में आया है कि कि जनांदोलन के आरम्भ से ही इस देश के उल्मा की भूमिका सकारात्मक, दयालू और सहानुभूतिशील रही है और उन्होंने सदैव जनता को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की नसीहत की है लेकिन साथ साथ जनता के अधिकारों की मांग भी जारी रखी है और इस बीच आंदोलन को हिंसक रूप से बचाए रखने में आयतुल्लाह ईसा क़ासिम की महत्वपूर्ण भूमिका का इंकार नहीं किया जा सकता हैं। लेकिन बहरैनी तानाशाह सरकार ने बजाए इसके कि उनका आभार व्यक्त करे और जनता की मांगों को पूरा करे, सदैव जनता यहाँ तक कि उल्मा से ज़ोर ज़बरदस्ती और धमकी भरे लहजे में बात की है।इसी तरह इस बयान में आयतुल्लाह ईसा क़ासिम को बहुत अच्छे व्यवहार और आध्यात्मिकता की उच्च श्रेणी पर पदासीन बताया गया है और कहा गया है कि उनके प्रति किसी भी प्रकार के अपमान के गंभीर परिणाम होंगे और उसके ज़िम्मेदार वहां के तानाशाह राजा, प्रधानमंत्री, दूसरे अधिकारी और सऊदी सरकार होगी। विश्व अहलेबैत (अ.) परिषद ने बहरैनी नागरिकों की नागरिकता समाप्त किए जाने को आले ख़लीफ़ा की आश्चर्यजनक और धर्म के विरूद्ध कार्यवाही बताते हुए ऐलान किया है किसी भी देश के शासक वहां की जनता के मालिक और स्वामी नहीं हैं कि उनसे, उनके इस अधिकार को छीन सकें। इसलिए उनकी यह कार्यवाही जबकि लगातार विदेशियों को वहां की नागरिकता दी जा रही है, जनता के प्रति उनकी दुश्मनी और उनके अधिकारों की अनदेखी करने की सूचक है।इस बयान के अंत में दुनिया भर के आज़ाद इंसानों, मुसलमानों और ख़ास कर उल्मा और अहलेबैत (अ.ह) का अनुसरण करने वालों से मांग की गई है कि वह इस खुले हुए अन्नयाय के विरूद्ध आवाज़ बुलंद करें और बहरैनी जनता का समर्थन करें।بسم الله الرحمن الرحیموَلاَ تَحْسَبَنَّ اللّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَऔर अल्लाह को उन कामों से कदापि बेख़बर नहीं समझना जो अत्याचारी कर रहे हैं।आले खलीफा के जल्लादों और ज़ालिमों के हाथों बहरैन के पीड़ित और निहत्थे लोगों के नरसंहार, हत्या, टॉर्चर, ध्वसं और विध्वंस तथा जेल और कारावास के शुरूआत से अब तक लगभग दो वर्ष का समय बीत रहा है, वह शर्मनाक अपराध जो आले सऊद के समर्थन और वैश्विक हुकूमतों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं की आपराधिक और घातक चुप्पी और बहरैन की जनता की उल्लेखनीय प्रशंसा और बे मिसाल प्रतिरोध, के साथ हमराह हैं।लेकिन बहुत अफ़सोस और आश्चर्य के साथ, वर्तमान दिनों में हमने देखा कि बहरैन की सरकार ने शर्मनाक अपराध को जारी रखा और साथ साथ दो और गैर कानूनी और गैर धार्मिक क़दम उठाये हैं।1. बहरैनी उलमा, बुद्धिजीवियों, विचारकों, डॉक्टरों और शिक्षकों विशेषकर आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम के खिलाफ धौंस धमकियां;2. बहरैन के कई आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले नागरिकों की नागरिकता को निरस्त किया जाना जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय और कानूनी मानक की रौशनी में सही नहीं है और बिना किसी औचित्य के है।इन दो खतरनाक क़दमों के विरोध में विश्व अहलेबैत (स.) परिषद दुनिया के करोड़ों मुसलमानों की शैक्षिक और सांस्कृतिक भारवाहक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में मुसलमानों का ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं की ओर आकर्षित करना चाहता है।1. जैसा कि कई बार ऐलान हुआ है, बहरैन के धार्मिक उल्मा  जनांदोलन के आरंभ (2011) से अब तक लगातार दयालू और सहानुभूतिशील भूमिका निभाते रहे हैं और लोगों की वैध मांगों को पेश करने के साथ साथ युवाओं को अपनी मांगें शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने की हिदायत करते रहे हैं। इस बीच आंदोलन को हिंसक रूप से बचाए रखने में आयतुल्लाह ईसा क़ासिम की महत्वपूर्ण भूमिका का इंकार नहीं किया जा सकता हैं। लेकिन बहरैनी तानाशाह सरकार ने बजाए इसके कि उनका आभार व्यक्त करे और जनता की मांगों को पूरा करे, सदैव जनता यहाँ तक कि उल्मा से ज़ोर ज़बरदस्ती और धमकी भरे लहजे में बात की है।2. आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम, बहुत अच्छे व्यवहार और आध्यात्मिकता की उच्च श्रेणी पर पदासीन हैं जो न केवल बहरैन में शिया और सुन्नी मुसलमानों के लिए लोकप्रिय और भरोसेमंद और सम्मानित है बल्कि इस देश की सीमाओं से बाहर भी मुसलमानों के लिए सम्मान योग्य और विश्वसनीय हैं और इस्लाम के प्रमुख विद्वानों और विचारकों में से एक हैं, इसलिए बहरैन और सऊदी सरकार को गंभीरता और कठोरता से चेतावनी दी जा रही है कि इस महान विद्वान उनके प्रति किसी भी प्रकार के अपमान के गंभीर परिणाम होंगे और उसके ज़िम्मेदार वहां के तानाशाह राजा, प्रधानमंत्री, दूसरे अधिकारी और सऊदी सरकार होगी। 3. आले ख़लीफ़ा के हाथों बहरैन नागरिकों की नागरिकता का रद्द किया जाना एक बहुत विचित्र, आश्चर्यजनक और धर्म के विरूद्ध कार्यवाही है किसी भी देश के शासक वहां की जनता के मालिक और स्वामी नहीं हैं कि उनसे, उनके इस अधिकार को छीन सकें और उन्हें उनके देश से बाहर निकाल सकें इसलिए उनकी यह कार्यवाही जबकि लगातार विदेशियों को वहां की नागरिकता दी जा रही है, जनता के प्रति उनकी दुश्मनी और उनके अधिकारों की अनदेखी करने की सूचक है और उनके नागरिक अधिकारों की अनदेखी करने के समान है।4.  स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के दावेदार देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बंदी सुरक्षा संगठनों और इस तरह की सभी संस्थाओं और संगठनों ने बहरैन के शासकों के अत्याचारों, कानून तोड़ने, मध्यकालीन की साम्राज्यवादी शैली एंव व्यवहार के सामने चुप्पी क्यों धारण की है? क्या अब दुनिया वालों की जिम्मेदारी नहीं है कि सभी संभावित तरीकों को उपयोग में लाकर बहरैन सरकार को उनकी गलत नीतियों को जारी रखने से रोक दें और बहरैन के मज़लूम व पीड़ित राष्ट्र का समर्थन करें?5. अंतरराष्ट्रीय नियमों के अलावा, हर देश की सरकार, एक परिवार के पिता की तरह है. क्या परिवार का बाप अपनी औलाद को घर से बेदखल करता है? क्या आले ख़लीफ़ा परिवार जो स्वयं कहीं और से आया है और जोर जबरदस्ती लोगों के भाग्यों पर सवार है बहरैनी जनता को उनके पुरखों की धरती से बाहर कर सकता है?6. विश्व अहलेबैत (अ) परिषद जैसा कि कई बार ऐलान कर चुका है शांति और संधि, दोस्ती, अद्ल व न्याय और दुनिया के इंसानों- चाहे वह किसी भी रंग और नस्ल और दीन और धर्म से संबंध क्यों न रखते हों- के शांतिपूर्ण बक़ा का समर्थक है. एक बार फिर बहरैन पर शासन करने वाले परिवार को न्याय, इंसाफ और जनता की वैध मांगों पर अमल के लिए आमंत्रित करता है।और यह परिषद आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम, बंदी विद्