13 अक्टूबर 2012 - 20:30

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरानी राष्ट्र इस्लामी शिक्षाओं के दृष्टिगत अतिक्रमण करने और चढ़ाई करने वाला राष्ट्र नहीं है परन्तु शत्रुओं की किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में पीछे नहीं हटेगा और शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देगा..........

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरानी राष्ट्र इस्लामी शिक्षाओं के दृष्टिगत अतिक्रमण करने और चढ़ाई करने वाला राष्ट्र नहीं है परन्तु शत्रुओं की किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में पीछे नहीं हटेगा और शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देगा।इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता की उपस्थिति में उत्तरी ख़ुरासान की शहीद नूरी छावनी में सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब (इस्लामी क्रांति विशेष दल) की हज़रत जवाद अइम्मा इंफ़ैन्ट्री, सेना, सैनिकों और स्वयंसेवी बसीजियों के जवानों की संयुक्त परेड हुई।वरिष्ठ नेता ने सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब की हज़रत जवादुल अइम्मा इंफ़ैन्ट्री में पहुंचने के बाद शहीदों की समाधियों पर उपस्थित हुए और दिफ़ाए मुक़द्दस (पवित्र प्रतिरक्षा यानि ईरान पर सद्दाम द्वारा थोपी गई आठ साला जंग) के शहीदों के लिए दुआ की और उनकी रूहों की शांति के लिए प्रार्थना की।इसके बाद मैदान में मौजूद दस्तों ने इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता को सलामी दी।वरिष्ठ नेता ने इस समारोह में सशस्त्र सेनाओं को मुल्क के लिए मजबूत सुरक्षा कवच और दुश्मनों के सैन्य ख़तरों के मुक़ाबले में मज़बूत क़िला बताते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र इस्लामी शिक्षाओं के कारण अतिक्रमण करने और चढ़ाई करने वाला राष्ट्र नहीं है परन्तु शत्रुओं की किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में पीछे नहीं हटेगा और शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देगा।वरिष्ठ नेता ने कहा कि वर्चस्ववादी और साम्राज्यवादी ताक़तों के जंग को बढ़ावा देने का मक़सद, पूंजीपतियों के हथियारों की बिक्री का रास्ता तय्यार करना है। आपने कहा कि शत्रुओं के जंगी जुनून और उसकी जंगी पालीसी को ख़त्म करने के लिए राष्ट्र और सशस्त्र सेना की पूरी तय्यारी व आमादगी ज़रूरी है।वरिष्ठ नेता ने कहा कि राष्ट्र विशेष कर जवानों में अपनी प्रतिक्षा के लिए आमादगी व पूरी तरह तय्यार रहने की भावना पहले से कहीं अधिक मजबूत है और सशस्त्र सेना भी पहले से कहीं अधिक तत्पर, मजबूत और शक्तिशाली है।वरिष्ठ नेता ने प्रतिरक्षा ताक़त में बढ़ोतरी को अल्लाह तआला की याद और आध्यात्मिकता को मौलिक कारण बताया और कहा कि आठ साल दिफ़ाए मुक़द्दस (पवित्र प्रतिरक्षा) में इस्लामी सैनिकों की सफ़लता, गज़्ज़ा की 22 दिवसीय जंग और लेबनान की 33 दिवसीय जंग में मुजाहेदों (अपने बचाव के लिए लड़ने वाले) के हाथों इस्राईल की सशस्त्र सेना की आश्चर्यजनक हार,  बढ़ती ताक़त में अल्लाह तआला की याद और आध्यात्मिकता के शानदार नमूने हैं।वरिष्ठ नेता ने कहा ईरानी राष्ट्र आज हर दौर की तुलना में शत्रुओं के मुक़ाबले में अधिक ताक़तवर और शक्तिशाली है और क़ुदरत, ताक़त और शक्ति का यह एहसास ज़मीनी वास्तविकता पर आधारित है।वरिष्ठ नेता ने ईरानी राष्ट्र और सशस्त्र सेना की आमादगी और तय्यारी का हवाला देते हुए उसे बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि ईरानी राष्ट्र और सशस्त्र सेना की आमादगी और ताबड़तोड़ कोशिशों की भावना ने शत्रुओं के दिल पर ऐसी हैबत डाल रखी है कि दुश्मन, हमले की सोच से घबरा जाता है।वरिष्ठ नेता और ईरान की सशस्त्र सेना के सुप्रीम कमांडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के भाषण से पहले सिपाहे पासदारान इंक़ेलाब के प्रमुख मेजर जनरल जाफ़री ने सशस्त्र सेना ख़ास कर सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब की सैन्य क्षमताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि शत्रुओं की लगातार धमकियों को सिपाहे पासदारान और ईरानी सेना नज़र में रखे हुए है और साथ ही अपने बचाव और मिसाइल प्रणाली को मजबूत बनाने और सिपाहे पासदारान और बसीज की क्षमताओं को बढ़ाने और शत्रुओं के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।इस समारोह के दौरान सशस्त्र सेनाओं के जवानों ने परेड की और सलामी चबूतरे के सामने गुज़रते हुए कुरआन को सलामी दी।समारोह के एंड पर वरिष्ठ नेता के सामने सशस्त्र सेना के सैनिकों ने शानदार परेड का प्रदर्शन किया.आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई बुधवार की सुबह उत्तरी ख़ुरासान के लोगों के भव्य स्वागत के दौरान इस स्टेट की राजधानी बुजनूर्द पहुंचे थे। आप बुजनूर्द में जनता को संबोधित करते हुए एरिये और दुनिया के ताज़ा हालात पर भी प्रकाश डाला।  वरिष्ठ नेता एक सप्ताह तक उत्तरी ख़ुरासान में जनता के मेहमान रहेंगे।.......166