एटमी बम बनाने को हराम बताने वाला सुप्रीम लीडर का इतिहासिक फ़त्वा न केवल यह कि ईरान के शांतिपूर्ण एटमी प्रोग्राम की तरक़्क़ी में प्रभावी (असर-अंदाज़) रहा है बल्कि झूठे दावे करने वालों को जो इस्लामफ़ोबिया के ज़रिए अपने नाजाएज़ (अवैध) मक़सदों को पूरा करना चाहते थे, एक गतिरोध (deadlock) पर पहुंचा दिया।फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण (एटमी हथियारों के फैलाव को रोकना और एटमी हथियारों को ख़त्म करना) की पहली इंटर-नेशनल कांफ़्रेंस में जो पिछले साल तेहरान में आयोजित हुई थी सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने एटमी बम के इस्तेमाल को हराम बताने वाले फ़त्वे को दोहराते हुए कहा कि हमारे अक़ीदे (विश्वास) के हिसाब से एटमी बम के अलावा क़त्लेआम (नरसंहार) करने वाले दूसरे सभी हथियार जैसे रसायनिक और जैविक हथियार, इंसानियत के लिए बहुत बड़ा ख़तरा हैं जिन्हें सीरियस लेने की ज़रूरत है, ईरानी क़ौम जो ख़ुद रसायनिक हथियारों का शिकार हो चुकी है, दूसरी क़ौमों से ज़्यादा इस तरह के हथियारों के बनाने और उन्हें स्टोर करने के ख़तरे को महसूस करती है और तय्यार है कि उसका मुक़ाबला करने में अपनी पूरी ताक़त लगा दे। हम इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल को हराम और इस खतरनाक मुसीबत से इंसानियत को बचाने की कोशिश को सभी का कर्तव्य जानते हैं।इसी तरह सुप्रीम लीडर ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आई ए ई ए) के अफ़सरों और ईरान के कुछ एटमी साइंटिस्टों से मुलाक़ात में एटमी हथियारों के हराम होने पर ताकीद करते हुए कहाः मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि जो मुल्क हमारे मुक़ाबले में खड़े हैं उनकी फैसले लेने वाली कमेटियाँ जानती हैं कि हम एटमी हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। सच बात यह है कि् एटमी बम से हमें को फ़ायदा भी नहीं है हम फ़िक्री और दीनी हिसाब से इस काम को ग़लत समझते हैं और इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल को बहुत बड़ा गुनाह जानते हुए उसको स्टोर करने को एक ख़तरनाक, बेफ़ायदा और व्यर्थ समझते हैं। और हरगिज़ उसे बनाने की कोशिश नहीं करेंगे। और वह लोग भी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन इस लिए प्रेशर डालते हैं ताकि इस तरक़्की को रोक सकें।सुप्रीम लीडर के इस इतिहासिक फ़त्वे ने कि एटमी बम बनाना हराम है, (वास्तव में सियासत के मैदान में यह फ़त्वा अख़लाक़ी व नीतिशास्त्रीय है) पश्चिम को नाकाम बना दिया है यद्धपि वह इस्लामी गणतंत्र ईरान से अपनी दुश्मनी को कभी ख़त्म नहीं करेंगे।ईरान के सबसे ऊंची पोस्ट के मालिक की तरफ़ से इस तरह के फ़त्वे के आने ने पूरी दुनिया को उसके बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। और ईरान के सियासी और मज़हबी दृष्टिकोण के हिसाब से इस फ़त्वे का रिपीट किये जाने को ईरान और पश्चिम के बीच डिप्तोमेटिक बातचीत में भी उठाया गया और यह फ़त्वा ईरान के शांतिपूर्ण एटमी प्रोग्राम की तरक़्क़ी में प्रभावी (असर-अंदाज़) रहा है।166
29 सितंबर 2012 - 20:30
समाचार कोड: 352516
एटमी बम बनाने को हराम बताने वाला सुप्रीम लीडर का इतिहासिक फ़त्वा न केवल यह कि ईरान के शांतिपूर्ण एटमी प्रोग्राम की तरक़्क़ी में प्रभावी (असर-अंदाज़) रहा है बल्कि झूठे दावे करने वालों को जो इस्लामफ़ोबिया के ज़रिए अपने नाजाएज़ (अवैध) मक़सदों को पूरा करना चाहते थे, एक गतिरोध (deadlock) पर पहुंचा दिया।.......