20 सितंबर 2012 - 20:30

तेहरान की केंद्रीय नमाज़े जुमा के इमाम आयतुल्लाह काज़िम सिद्दीक़ी ने नमाज़ियों को संबोधित करते हुए ईरान के विरुद्ध थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध के दौरान ईरानी राष्ट्र के बलिदान एवं परिपक्वता को इस्सलामी गणतंत्र ईरान के गौरवशाली इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ बताया........

तेहरान की केंद्रीय नमाज़े जुमा के इमाम आयतुल्लाह काज़िम सिद्दीक़ी ने नमाज़ियों को संबोधित करते हुए ईरान के विरुद्ध थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध के दौरान ईरानी राष्ट्र के बलिदान एवं परिपक्वता को इस्सलामी गणतंत्र ईरान के गौरवशाली इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ बताया.तेहरान में जुमे की नमाज़ के ख़ुतबों में आयतुल्लाह सिद्दीक़ी ने इराक़ के पूर्व तानाशाह सद्दाम द्वारा ईरान पर थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों के बलिदान एवं परिश्रम की ओर संकेत करते हुए उल्लेख किया कि आठ वर्षीय प्रतिरोध के दौरान विभिन्न देशों ने सद्दाम का समर्थन एवं सहायता की किन्तु ईरानी वीरों ने ईश्वर की सहायता और स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के मार्ग दर्शन में इस युद्ध में गौरव प्राप्त किया और शत्रु को पीछे हटने पर विवश कर दिया। आयतुल्लाह काज़िम सिद्दीक़ी ने इसी प्रकार इस्लाम विरोधी अमरीकी-ज़ायोनी फ़िल्म और फ़्रांस की एक पत्रिका द्वारा पैग़म्बरे इस्साम के अपमान के संदर्भ में कहा पैग़म्बरे इस्लाम का अपमान समस्त ईश्वरीय दूतों का अपमान है। आयतुल्लाह सिद्दीक़ी ने इस वास्तविकता का उल्लेख करते हुए कि विश्व के अनेक ग़ैर मुस्लिम विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों ने पैग़म्बरे इस्लाम (स) की हस्ति को महान एवं आदर्शपूर्ण बताया है कहा हज़रत मोहम्मद (स) पवित्रता, प्रेम, नैतिकता एवं समस्त अच्छाईयों का केंद्र थे। उन्होंने कहा कि विश्व में दिन प्रतिदिन इस्लाम का विस्तार, क्षेत्रीय देशों द्वारा इस्लामी क्रांति से प्रेरणा लेना एवं इस्लामी जागृति की लहर में पश्चिम समर्थित तानाशाहों का बह जाना, इस्लाम विरोधी अमरीकी ज़ायोनी गतिविधियों तथा षडयंत्रों के मूल कारण हैं। इसी प्रकार आयतुल्लाह सिद्दीक़ी ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के जारी रहने पर बल दिया।........166