11 सितंबर 2012 - 19:30

कुछ मुल्कों ख़ास कर बहरैन में मानवाधिकारों के हनन की समीक्षा के लिए जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद की बैठक आरंभ हो गयी है.......

कुछ मुल्कों ख़ास कर बहरैन में मानवाधिकारों के हनन की समीक्षा के लिए जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद की बैठक आरंभ हो गयी है। रिपोर्टें इस बात की सूचक हैं कि इन मुल्कों में मानवाधिकारों का हनन यथावत जारी है। क्षेत्र के संचार माध्यमों ने लिखा कि हालिया दिनों में बहरैन के बारह गांव ज़हरीली गैसों में डूबे रहे। यह ऐसी स्थिति में है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही जनता पर बहरैनी और सऊदी सुरक्षा बलों के आक्रमण यथावत जारी हैं। बहरैन में कोई भी दिन ऐसा नहीं होता कि प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के आक्रमण न हों और भारी संख्या में अपने अधिकारों की मांग करने वाले प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार न किए जाएं। देश वर्ष से अधिक का समय हो रहा है जनता की वैध मांगों का उत्तर गोलियों, जेल और हिंसा से दिया जा रहा है। बहरैन की वेफ़ाक़ पार्टी ने बहरैन की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया कि सुरक्षा बल, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही जनता पर विषैले आंसू गैस और मूर्क्षित करने वाले हथगोलों का प्रयोग कर रहे हैं। मनामा की सरकार प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए विभिन्न शैलियों का प्रयोग कर रही है और इसीलिए हालिया महीनों में अमरीका और ब्रिटेन ने इस देश के सुरक्षा बलों को आधुनिक शस्त्रों से लैस किया है। हालिया डेढ़ महीन के दौरान बहरैन और अमरीका के मध्य कई सैन्य समझौते हुए हैं और वाशिंग्टन ने आले ख़लीफ़ा शासन के पूर्ण समर्थन का वचन भी दिया हैं। बहुत से टीकाकारों का कहना है कि इन्हीं समर्थनों के कारण आले ख़लीफ़ा शासन अधिक दुसाहसी हो गया है और यह आले ख़लीफ़ा शाससन को बहरैनी जनता के दमन के लिए अमरीका और ब्रिटेन की हरी झंडी है। इन सबके बावजूद बहरैन की सभी पार्टियों, राजनैतिक दलों और जनता ने बल दिया है कि आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध प्रदर्शनों का क्रम जारी रहेगी और शुक्रवार को भव्य प्रदर्शन निकालने के लिए जनता का अह्वान भी किया गया है।(तेहरान रेडियो के शुक्रिये के साथ)