26 अगस्त 2012 - 19:30

मरजए तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा लुत्फ़ुल्लाह साफ़ी गुलपाएगानी ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख देशों और सरकारों से सम्बोधित होकर कहा राष्ट्रों की उम्मीद है कि उनके प्रमुख और प्रतिनिधी ऐसे विशाल सम्मेलन में महान अवसर से लाभ उठाएंगे

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी - अबना - की रिपोर्ट के अनुसार मरजए तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा लुत्फ़ुल्लाह साफ़ी गुलपाएगानी ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख देशों और सरकारों से सम्बोधित होकर कहा राष्ट्रों की उम्मीद है कि उनके प्रमुख और प्रतिनिधी ऐसे विशाल सम्मेलन में महान अवसर से लाभ उठाएंगे और इस युग में इंसानों विशेषकर कमजोर समुदायों के सामने जों अनगिनत समस्याएं हैं उनके हल करने के लिए ऐसे उचित निर्णय लेंगे कि अमीर और अत्याचारी शक्तियों के तक सीमित होने वाली शक्ति, कम हो।उन्होंने तेहरान में आयोजित गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें सम्मेलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस्लामी देशों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों को चाहिए कि वह इस्लाम में इंसानों के सम्मान के निर्धारित नियमों को देखते हुए इंसान की खैर व सलाह और विश्व शांति पर आधारित कुरान की महान सिफारिशों और निर्देशों को दुनिया वालों तक पहुँचाएँ।गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के प्रमुखों के नाम आयतुल्लाहिल उज़्मा साफ़ी गुलपाएगानी का संदेश:بسم الله الرحمن الرحیمقال الله تعالی: تَعَالَوْاْ إِلَى کَلَمَةٍ سَوَاء بَیْنَنَا وَبَیْنَکُمْ أَلاَّ نَعْبُدَ إِلاَّ اللّهَ وَلاَ نُشْرِکَ بِهِ شَیْئًا وَلاَ یَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ اللّهِऐ पैग़म्बर (स.)! आप कह दें कि ऐ अहले किताब आओ उस चीज़ की तरफ़ जो हमारे और तुम्हारे बीच समान है कि अल्लाह के अलावा किसी की इबादत न करें, किसी को उसका हिस्सेदार (शरीक) न बनाएं, अल्लाह के अतिरिक्त आपस में एक दूसरे को परमेश्वर का दर्जा न दें।गुट निरपेक्ष आंदोलन की बैठक एक महान सभा है जिसका मेजबान इस साल, ईरान है और सभी राष्ट्रों की उम्मीद है कि उनके प्रमुख और प्रतिनिधी ऐसे विशाल सम्मेलन में इस महान अवसर से इंसानों विशेषकर कमजोर राष्ट्रों के सामने मौजूद संकट के हल करने के लिए योजनाएं बनाएं और ऐसे फैसले करें जिनके साथ अमीर और अत्याचारी शक्तियों के हाथों में मौजूद शक्ति में कमी आए और सभी राष्ट्रों और उम्मतों को बराबरी से न्याय, शांति और सुरक्षा, कल्याण और विकास जैसे सभी वास्तविक मानवीय अधिकार प्राप्त हो जाएं।इस्लामी देशों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वह इस्लाम में इंसानों के सम्मान के निर्धारित नियमों को देखते हुए इंसान की खैर व सलाह और विश्व शांति पर आधारित कुरान की महान सिफारिशों और निर्देशों को दुनिया वालों तक पहुँचाएँ। और आपस में सभी मुश्किलों की जो आज नकारात्मक उद्देश्यों और जिहालतों के कारण इस्लामी जगत के सामने हैं और डेढ़ अरब मुसलमानों पर आधारित महान इस्लामी वतन को आंतरिक मतभेद और झगड़ों में उलझा रही हैं समीक्षा करें और उन्हें सुलझाने और आतंकवाद, वहाबी विचारों और आत्मघाती हमलों की निंदा करें और इस्लाम व कुरानी शिक्षा के प्रति अपने अहद व पैमान को ताज़ा कर अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें।वस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह साफ़ी गुलपाएगानी9 शव्वालसमाप्त....166