अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार मिस्र के दैनिक अल-अहराम ने अपने आज के अंक में "आदिल शहबोन" के क़लम से लिखा है कि तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन के लिए आरंभिक चरणों के शुरू होने के दिनों से लेकर अब तक इस्राइल एक पल भी चैन से नहीं बैठा और उसने पूरी पूरी कोशिश की कि आंदोलन के सदस्य देशों की अधिकांश संख्या इस बैठक में भाग न लें।मिस्री दैनिक अल-अहराम ने लिखा कि तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन ने ज़ायोनियों का चैन छीन लिया है और रातों की नींद उड़ा दी है।शहबोन ने लिखा है: इस्राईल ने उस समय अपने प्रयासों को और तेज़ कर दिया जब पिछले रविवार को सुप्रीम लीडर और राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने इस्रराईल को एक बार फिर कैन्सर का फोड़ा और इस्लामी जगत की सबसे बड़ी मुश्किल बताया।उन्होंने लिखा: यहूदी राज्य के इन्हीं प्रयासों के क्रम में पिछले हफ्ते ज़ायोनी प्रधानमंत्री बिनयामेन नितेन याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से कहा था कि वह तेहरान में हो रहे सम्मेलन में भाग न लें क्योंकि तेहरान बैठक में उनका भाग लेना बहुत बड़ी ग़लती होगी।नितेन याहू ने बान की मून से कहा: "आप का तेहरान दौरा ईरानी सरकार को कानूनी वैधता प्रदान करेगा".शहबोन के अनुसार, तिलावीव मिस्री राष्ट्रपति के तेहरान दौरे के फैसले के बाद से तेहरान बैठक को महत्व देने लगे हैं।ज़ायोनी समाचार पत्रों ने लिखा है: मोहम्मद मुरसी द्वारा तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के फैसले ने इस्राईल को क्रोधित कर दिया है।ज़ायोनी पत्रिकाओं और अख़बारों ने लिखा है: ईरान इस्राईल और क्षेत्रीय देशों के लिए खतरा है और मिस्र के राष्ट्रपति का ईरान दौरा निंदनी है।ज़ायोनी अखबारों ने मिस्र के राष्ट्रपति के ईरान दौरे के फैसले की ओर इशारा करने के बाद यह सवाल उठाया है कि "अगर इस्राईल ईरान पर हमला करे तो मिस्र का कहना क्या होगा क्या ऐसी स्थिति में मिस्र खामोश रहेगा क्या राष्ट्रपति मुरसी का ईरान दौरा मिस्र और इस्राईल के संबंधों पर प्रभावी होगा?ज़ायोनी पत्रिकाओं ने लिखा है कि मुरसी के तेहरान दौरे ने क्षेत्र के भविष्य की परिस्थितियों और काहिरा तेलावीव संबंधों के बारे में अनगिनत प्रश्नों को जन्म दिया है क्योंकि शक नहीं है कि मुरसी के दौर में मिस्र की विदेश नीति में विशेष फर्क आएगा. दूसरी तरफ़ ईरानी संसद के अध्यक्ष डॉ. अली लारीजानी ने तेहरान बैठक में मुरसी की भागीदारी के संकल्प को सार्थक बताया और कहा कि हुसनी मुबारक के दौर में ईरान और मिस्र के संबंध टूट गए थे लेकिन मुरसी रे तेहरान दौरे की बदौलत सम्बंध क़रीब होंगे और यह दोनों देशों के हित में होगा।उल्लेखनीय है कि ईरान और मिस्र के रिश्ते 1979 में इस्लामी क्रांति की सफलता और मिस्र के तत्कालीन तानाशाह अनवर सादात के माध्यम से ज़ायोनी शासन को स्वीकार किए जाने के बाद से टूटे हुए थे और उस समय से ईरान और मिस्र के बीच राजनयिक संबंध बहाल नहीं थे।समाप्त......166
गुट निरपेक्ष आंदोलन का सोलहवाँ शिखर सम्मेलन-50
मिस्री दैनिक अल-अहरामः तेहरान शिखर सम्मेलन ने ज़ायोनियों की नींद उड़ा दी है
26 अगस्त 2012 - 19:30
समाचार कोड: 340056
मिस्री दैनिक अल-अहराम ने लिखा कि तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन ने ज़ायोनियों का चैन छीन लिया है और रातों की नींद उड़ा दी है......