25 अगस्त 2012 - 19:30

गुट निरपेक्ष आंदोलन का सोलहवाँ सम्मेलन पच्चीस से इक्तीस अगस्त तक तेहरान में आयोजित हो रहा है जबकि सभी तेहरान में इसके आयोजन के महत्व को स्वीकार कर रहे हैं। ईरान के क्षेत्र में प्रतिरोध, जागरूकता, धमकियों और बढ़ते प्रतिबंधों की धुरी और केंद्र होने और इस्लामी गणतंत्र को क्षेत्र और विश्व स्तर पर अकेला कर देने के पश्चिमी दावों ने तेहरान में सम्मेलन और इसमें 138 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के महत्व को और बढ़ा दिया है

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी -अबना- की रिपोर्ट के अनुसार गुट निरपेक्ष आंदोलन का सोलहवाँ सम्मेलन पच्चीस से इक्तीस अगस्त तक तेहरान में आयोजित हो रहा है जबकि सभी तेहरान में इसके आयोजन के महत्व को स्वीकार कर रहे हैं। ईरान के क्षेत्र में प्रतिरोध, जागरूकता, धमकियों और बढ़ते प्रतिबंधों की धुरी और केंद्र होने और इस्लामी गणतंत्र को क्षेत्र और विश्व स्तर पर अकेला कर देने के पश्चिमी दावों ने तेहरान में सम्मेलन और इसमें 138 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के महत्व को और बढ़ा दिया है।गुट निरपेक्ष आंदोलन की शुरूआत 1961 ईसवी यानी 1340 हिजरी शम्सी में उस समय डाली गई जब शीत युद्ध और पूर्व और पश्चिम के बीच खींचातानी अपने चरम पर थी। इस आंदोलन को अस्तित्व में लाने का उद्देश्य ऐसे देशों के बीच गठबंधन पैदा करना था जो न कम्यूनिज़्म (पूर्वी ब्लॉक) की ओर रूचि रखते थे और न पूंजीवादी प्रणाली (पश्चिम ब्लॉक) की ओर। उसका पहला सम्मेलन 1955 ईसवी में इंडोनेशिया में आयोजित हुआ। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने वर्ष 1979 ईसवी में इस्लामी क्रांति की महान सफलता के बाद गुट निरपेक्ष आंदोलन से जुड़ कर पहली बार 1979 में ह्वाना में भाग लिया. इसके बाद आंदोलन द्वारा आयोजित होने वाली सारे सम्मेलनों में भाग लेता चला आ रहा है।138 देशों के शामिल होने के साथ गुट निरपेक्ष आंदोलन संयुक्त राष्ट्र के बाद सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो विभिन्न मौकों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सकारात्मक भूमिका निभाने में सफल रहा है जिसमें पिछले वर्षों में ईरान की ओर से होने वाली परमाणु गतिविधियों से अपना भरपूर बचाव भी शामिल है।ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने जो स्वयं एक समय तक इस आंदोलन में ईरानी राष्ट्रपति के रूप में शामिल होते रहे, विभिन्न सभाओं में आंदोलन के महत्व और उसकी भूमिका पर बल दिया है।2004 में मलेशिया - जो उस समय इस्लामी सम्मेलन और गुट निरपेक्ष आंदोलन की अध्यक्षता कर रहा था- के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अहमद बदावी से मुलाकात के दौरान सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने मुसलमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय जोर जबरदस्ती करने वाली शक्तियों की राजनीति से निपटने का एकमात्र रास्ता एकता और मजबूती को बताया था। गुट निरपेक्ष आंदोलन की शुरूआत की तुलना में दुनिया की बदलती हुई शर्तों के बीच आंदोलन की भूमिका और संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुट निरपेक्ष आंदोलन की 60 फीसदी भागीदारी की ओर इशारा करते हुए कहा: "ऐसे में जब अमरीका सहित विश्व की बड़ी शक्तियों अपनी लाभ के लिए संयुक्त राष्ट्र में परिवर्तन करने की कोशिश कर ही हैं, गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों की एक प्रमुख जिम्मेदारी इस विषय से मुक़ाबला करने के लिए अपना भरपूर योगदान देना है।इस्लामी गणतंत्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में मलेशिया और गुट निरपेक्ष आंदोलन के अच्छे पक्ष की सराहना करते हुए इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने बल दिया: "सैद्धांतिक रूप से हम परमाणु हथियार बनाने के विरोधी हैं लेकिन ईरान के साथ अमेरिका और अन्य कुछ पश्चिमी देशों की समस्या यह है कि वह नहीं चाहते कि विकसित परमाणु ज्ञान उनके क्षेत्र से बाहर निकले और जानकारों और ऊर्जा का महत्वपूर्ण क्षेत्र दूसरे देशों के अधिकार में आ जाये.इसी तरह वर्ष 2003 में इन्डोनेशियाई राष्ट्रपति से मुलाकात में एशियाई और अफ़्रीकी स्वतंत्र देशों को नजदीक करने में स्वर्गीय सोकारनो के प्रयासों की ओर इशारा करते हुए कहा: "वह महत्वपूर्ण कारण जो उस जमाने में एशियाई और अफ़्रीकी देशों को एक मंच पर इकट्ठा करने और बाद में गुट निरपेक्ष आंदोलन को अस्तित्व में लाने में सफल हुआ, वह संयुक्त जरूरत थी. आज भी इस्लामी देशों को आपसी सहयोग और सम्पर्क की जरूरत है."।गुट निरपेक्ष आंदोलन के पुनर्जनन पर देते हुए सुप्रीम लीडर द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला एक और प्वाइंट है, वह नुक्ता जो देशों के बीच नजदीकी सहयोग के माध्यम से प्राप्त होगा. आपने सन 1994 में जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति से अपनी मुलाकात में विकासशील देशों के बीच वास्तविक सहयोग के रास्ते में बड़े देशों की ओर से पैदा की जाने वाली रुकावटों की तरफ़ इशारा किया और दुनिया के छोटे देशों से की ओर से नज़दीकी सहयोग से गुट निरपेक्ष आंदोलन के पुनर्जनन की जरूरत पर बल दिया।आपने सन् 1991 में अपने राष्ट्रपति होने के दौरान एकरोडेटा, नेपाल, वियतनाम, पानामह, गनी, और युगोस्लाविया के आधुनिक राजदूतों से भेंट में गुट निरपेक्ष आंदोलन के महत्व की ओर इशारा किया।हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के नवें शिखर सम्मेलन में युगोस्लाविया की मेजबानी की ओर इशारा करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं कि "हमारा विश्वास है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन को दुनिया में अपनी एक स्वतंत्र पहचान रखनी चाहिए और आंदोलन को ज़ोर ज़बरदस्ती को अपनी आदत बनाने वाली बड़ी शक्तियों को भयभीत करने वाला एक कारक बनना चाहिए।उन्होंने कहा: "अफसोस कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के कुछ सदस्य आग्रह कर रहे है कि साम्राज्यवादी शक्तियों को सुनिश्चित कराया जाए कि यह आंदोलन उनके लिए खतरा नहीं है उनके विपरीत हमारा विश्वास है कि बड़ी शक्तियों को गुट निरपेक्ष आंदोलन से भयभीत रहना चाहिए। जब भी वह किसी छोटे देश पर हमला करने के इरादा करें तो यह जरूर ध्यान रखें कि 101 गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देश उनके मुकाबले में खड़े हो जाएंगे।"इस बैठक में समाजवादी संघीय गणराज्य युगोस्लाविया के नए राजदूत टराईको टराईको फस्की ने अपने बयान में गुट निरपेक्ष आंदोलन में ईरान की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा था: "हम गुट निरपेक्ष आंदोलन में ईरान के लिए काफी महत्व के स्वीकार कर्ता हैं।"बहरहाल तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन का सोलहवां शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है और अधिकारियों के कहने के अनुसार विभिन्न देशों के लगभग 50 प्रमुख इस बैठक में भाग लेंगे। पश्चिमी दुनिया प्रोपगंडे और मीडिया द्वारा इस प्रयास में लगी रही कि किसी तरह सोलहवें सम्मेलन की भूमिका को धुंदला करे लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि क्षेत्र में ईरान की भूमिका और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में उसका प्रभाव अन्य देशों के बीच पश्चिम के महत्व घटने का कारण बन चुका है।समाप्त.....166