अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातमी ने पिछले शुक्रवार को तेहरान में नमाज़े जुमा के मौक़े पर गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन के समय का उल्लेख करते हुए कहाः"यह सम्मेलन सन 1960 ईसवी में पच्चीस देशों की सदस्यता के साथ आयोजित हुआ जिसका उद्देश्य अमरीका और सोवियत संघ से दूरी प्रकट करना था. वर्ष 2000 ईसवी में पच्चीस देश बढ़ते बढ़ते 113 देश और 17 कार्यवाहक देश हो गए और आज लगभग 120 देश इस आंदोलन के सदस्य हैं।"उन्होंने कहा: "इस्लामी क्रांति से पहले ईरान पश्चिम का समर्थक था और गुट निरपेक्ष आंदोलन में शामिल नहीं था लेकिन क्रांति की सफलता के बाद लिए जाने वाले कुछ निर्णयों में से एक गुट निरपेक्ष आंदोलन में शामिल होना था।"आयतुल्लाह खातमी ने बात को जारी रखते हुए कहाः "पूर्व की परिभाषा में महाशक्ति टूट कर बिखर चुकी है लेकिन अमरीका किसी तर्क के बिना दुनिया को एक ऐसे गाँव के समान देख रहा है, जिसका वह मुखिया है और दुनिया के कोने कोने में इस देश के बारे में पाई जाने वाली घृणा के बावजूद दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप करने से बाज़ नहीं आता।"उन्होंने कहा: "एक अमेरिकी संस्था 1375 में होने वाले एक सर्वेक्षण के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि सऊदी अरब की 65 प्रतिशत जनता अमरीका के खिलाफ थी जो बढ़ते बढ़ते अब 90 प्रतिशत हो गई है. तुर्की में 95 प्रतिशत जनता ने अमेरिका को अविश्वसनीय देश घोषित कर दिया है और मध्य पूर्व में इसकी संख्या 87 प्रतिशत है।"तेहरान के इमामे जुमा ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा "अमेरिका हर जगह जिद पर अड़ा रहता है. इराक और सीरिया के आतंकवादियों की सहायता करता है. इसलिए हम आशा करते हैं कि गुट निरपेक्ष आंदोलन की बैठक उस के ख़िलाफ़ एक्शन जरूर लेगा क्योंकि अमरीका और ज़ायोनी शासन आज गुंडागर्दी करते हुए बहरैन में निंदनीय अपराध और सऊदी अरब में मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं।"उन्होंने कहा: "यदि वास्तव में गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देश अभी भी निरपेक्ष हैं तो उन्हें अमेरिका से अपनी निरपेक्षता साबित करनी होगी और लोग देख रहे हैं कि क्या अब भी यह आंदोलन निरपेक्ष है या नहीं?"आख़िर में आयतुल्लाह सैयद अहमद खातमी ने उम्मीद जताई कि तेहरान में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन अपने साथ उपरोक्त बरकतें लाएगा समाप्त....166
22 अगस्त 2012 - 19:30
समाचार कोड: 338864
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातमी कहाः "यह सम्मेलन सन 1960 ईसवी में पच्चीस देशों की सदस्यता के साथ आयोजित हुआ जिसका उद्देश्य अमरीका और सोवियत संघ से दूरी प्रकट करना था. वर्ष 2000 ईसवी में पच्चीस देश बढ़ते बढ़ते 113 देश और 17 कार्यवाहक देश हो गए और आज लगभग 120 देश इस आंदोलन के सदस्य हैं۔۔۔۔۔۔۔۔۔