21 अगस्त 2012 - 19:30

अब जबकि तेहरान में होने वाले गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें शिखर सम्मेलन में कुछ ही दिन बाक़ी बचे हैं और हालात ऐसे हैं कि हर दिन ईरान पर हमले की इस्राईली धमकियों में बढ़ोतरी हो रही है अमेरिका के सेवानिवृत्त सैनिकों पर आधारित वेटरेन फ़ार पीस नामी संगठन ने अपने एक पत्र द्वारा गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्यों से इस संदर्भ में ठोस क़दम उठाने की मांग की है।

अब जबकि तेहरान में होने वाले गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें शिखर सम्मेलन में कुछ ही दिन बाक़ी बचे हैं और हालात ऐसे हैं कि हर दिन ईरान पर हमले की इस्राईली धमकियों में बढ़ोतरी हो रही है अमेरिका के सेवानिवृत्त सैनिकों पर आधारित वेटरेन फ़ार पीस नामी संगठन ने अपने एक पत्र द्वारा गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्यों से इस संदर्भ में ठोस क़दम उठाने की मांग की है।ताबनाक समाचार की रिपोर्ट के अनुसार वेटरेन फ़ार पीस नामी संगठन एक अनौपचारिक संस्था है, और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मान्यता प्राप्त है। और 1985 में अमरीकी सेना से सेवानिवृत्त दिग्गज सैनिकों ने उसका गठन किया था और उस समय से आज तक उसने पश्चिम और ग़ासिब जायोनी शासन की युद्ध पर आधारित नीतियों के मुक़ाबले में महत्वपूर्ण क़दम उठाए हैं।इस संगठन ने अपने हालिया पत्र में गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए लिखा हैःहम गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्यों से अपील करते हैं कि उनमें जितनी भी शक्ति है वह ईरान पर होने वाले हमले के विरूद्ध प्रयोग करें। इस्राईल के नेताओं ने अमेरिका में 9 नवम्बर को होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव से पहले के समय को उचित अवसर जाना है ताकि अमेरिका इस हमले की गारंटी दे। और फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी सैन्य बेड़ों का जमावड़ा इसका पक्का प्रमाण है।अब जबकि आप गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य इस सप्ताह के आख़िर में एक दूसरे से मुलाक़ात करेंगे, ऐसा लगता है कि स्पष्ट रूप से बातचीत करने और चेतावनी देने का समय आ गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राईल के सरकारी बयान स्पष्ट रूप से बयान करते हैं कि ईरान पर हमले के विकल्प खुले हैं।इस तरह इस्राईल और अमेरिका अनौपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ के दूसरे अनुच्छेद का स्पष्ट उलंघ्घन कर रहे है, जो उस देश पर जबरन पाबंदी लगा रहे है और ख़ुल्लम ख़ुल्ला धमकी दे रहे हैं जिससे फ़िलहाल कोई ख़तरा नहीं है, जिस तरह 2003 में इराक़ पर ग़ैर क़ानूनी हमला देखने में आया था अतः इस तरह की धमकियां क्रियात्मक कार्यवाही के लिए मैदान तैयार कर सकती हैं।अमेरिका से सम्बंधित मीडिया वैसी ही जानकारियों और फ़र्ज़ी बातों को फैलाने में व्यस्त है जैसी बातें उन्होंने दस वर्ष पूर्व इराक़ पर हमला करने के लिए फ़ैलाई थीं। जबकि जनवरी में अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा और इस्राईली रक्षा मंत्री ईहूद बाराक ने स्वीकार किया था कि ईरान परमाणु बम बनाने का प्रयास नहीं कर रहा है परन्तु ईरान के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही का विकल्प केवल इसलिए है कि वह बम बना सकता है।हम सेवानिवृत्त अमरीकी सैनिक जानते हैं कि युद्ध में क्या होता है परन्तु अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा नहीं जानते और उनके राजनीतिक सलाहकार भी नहीं जानते हैं इसके अतिरिक्त विशेष कर जबकि उनका ध्यान लगभग अमेरिका में होने वाले आगामी चुनाव पर केंद्रित है।और सबसे ख़तरनाक बात यह है कि इस्राईली नेताओं की तरफ़ से व्हाइट हाउस की यह ताकीद की सभी विकल्प खुले हैं ख़ासकर सैन्य कार्यवाही का इस तरह बयान करना कि मानो अनंततः ओबामा ईरान पर हमले के लिए ग्रीन सिग्नल देने पर मजबूर हो जाएंगे और अमेरिका उसका पूरी तरह सैन्य समर्थन करेगा।वेटरेन फ़ार पीस ने सदैव प्रयास किया है कि ईरान के विरूद्ध धमकियों के बारे में चेतावनी दे परन्तु हमारी चेतावनियों को अमेरिका से सम्बंधित मीडिया में जगह नहीं मिलती है। छः महीने पूर्व हमने औपचारिक रूप से अमरीकी राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में चेतावनी दी थी कि वह इस मुद्दे पर नितन्याहू से गंभीर लहजे में बात करें।हाल ही में हमने 12 अगस्त 2012 को अपनी राष्ट्रीय सम्मेलन की समाप्ति पर एक घोषणा पत्र जारी किया था जो इस प्रकार हैःहम ईरानी राष्ट्र के साथ अपनी एकजुटता पर ताकीद करते हुए अमेरिका से अपील करते हैं कि वह ईरान पर लगाई गई आर्थिक पाबंदियों को हटा ले इस लिए कि यह एक युद्ध पर आधारित कार्यवाही है और यह पाबंदियां ईरानी जनता को नुक़सान पहुंचा रही हैं हम अपने शासन से अपील करते हैं कि युद्ध पर आधारित धमकियों को समाप्त करे और ओबामा से मांग करते हैं कि स्पष्ट रूप से इस्राईल के सामने घोषणा करे कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान पर हमले की स्थिति में उसका समर्थन नहीं करेगा।अधिकांश अमरीकी और इस्राईली ईरान से युद्ध नहीं चाहते हैं और उसके विरूद्ध कठोर पाबंदियों की तरह यह भी केवल अमेरिका और इस्राईल के शासनों और पश्चिमी मीडिया की बयानबाजी और प्रोपगंडे हैं कि जिसकी वजह से बहुत से लोगों को लगने लगा है कि ईरान के विरूद्ध पाबंदी आवश्यक और नैतिक हिसाब से सही है।गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देश दूसरों के मुक़ाबले में इस तरह के हथकंडों के नुक़सानों से ज़्यादा जानकारी रखते हैं।ईरान के विरूद्ध कठोर आर्थिक पाबंदी अनुचित और इल्लाजिकल है और ईरान पर हमला भी अंतरराष्ट्रीय अधिकारों का खुला हुआ उलंघ्घन है।अब समय नहीं है कि हम किनारे बैठकर केवल यह देखें कि क्या होने वाला है इसलिए हम गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रमुखों से अपील करते हैं कि तेहरान में होने वाले सम्मेलन में जितना उनसे हो सके ईरान के विरूद्ध धमकियों की समाप्ति और उस पर लगी आर्थिक पाबंदियों के विरूद्ध कठोर क़दम उठाएं।समाप्त......166