बहरैन की जनता ने आज भी विभिन्न क्षेत्रों में ऑले खलीफा की पिठ्ठू सरकार के विरूद्ध विरोध प्रदर्शन किए। याद रहे आज के प्रदर्शन में अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ भी नारे लगाए गए। अमेरिका और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ऑले खलीफा के खिलाफ वोट नहीं दिया था जिस पर बहरैनी जनता ने नाराज़गी प्रकट करते हुए इस कदम की निंदा की है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दिन भी बहरैन के क्रांतिकारी जवानों ने मनामा में उस सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया था जिस पर अमेरिकी दूतावास है। क्रांतिकारियों ने टायर जला कर सड़क को बंद कर दिया था। बहरैन के क्रांतिकारी दलों ने आले खलीफा की बढ़ती हिंसा और देश में आपातकाल लगाने के निश्चय की ओर इशारा करते हुए कहा कि बहरैन में मानवाधिकारों की अनदेखी करी गयी है। उधर बहरैन के अहरार आंदोलन के महासचिव ने कहा है कि ऑले खलीफा के चार लोग क्रांतिकारियों को शारीरिक पीड़ाएं पहुंचाने में लिप्त हैं। सईद शहाबी ने अला-आलम टी वी से बातचीत में कहा कि उन लोगों में बहरैन के तानाशाह का बेटा भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि बहरैनी जनता अपने छीने गए अधिकारों की प्राप्ति एवं आले खलीफा की जाहिलाना पक्षपात नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर रही है।समाचार समाप्त......166
6 जुलाई 2012 - 19:30
समाचार कोड: 327288
अमेरिका और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ऑले खलीफा के खिलाफ वोट नहीं दिया था जिस पर बहरैनी जनता ने नाराज़गी प्रकट करते हुए इस कदम की निंदा की है.........