27 जून 2012 - 19:30

मिस्र के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी और सैनिक परिषद के बीच शपथ ग्रहण समारोह के बारे में मतभेद बदस्तूर जारी हैं......

मिस्र के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी और सैनिक परिषद के बीच शपथ ग्रहण समारोह के बारे में मतभेद बदस्तूर जारी हैं। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सैन्य परिषद के सदस्य जनरल मोहम्मद अल्-अस्र ने मिस्र के सी बी सी चैनल से साक्षात्कार में कहा है कि सैन्य परिषद जिसने पूर्व तानाशाह हुसनी मुबारक के सत्ता से हटने के बाद से देश की व्यवस्था सभाले रखी थी तीस जून को नई सरकार को सत्ता सौंप देगी। उन्होंने कहा कि मोहम्मद मुरसी को राष्ट्रपति के सभी अधिकार मिल जाएंगे लेकिन राष्ट्रपति की शपथ ग्रहण के बारे में मतभेद अभी जारी हैं। मिस्र के एक जनरल मोहम्मद हिजाज़ी ने कहा है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को संवैधानिक अदालत के सामने शपथ लेना होगी जिसे सेना ने संविधान के संशोधन के रूप में मान्यता दी है। उल्लेखनीय है कि मिस्र की सैन्य परिषद ने संसद को भंग करके चुनाव को अवैध बताया था और संसद के अधिकार अपने जिम्मे ले लिए थे। संसद में अख़वानुल-मुसलेमीन की बहुमत थी।अखवानुल-मुसलेमीन ने सेना के इस कदम को विद्रोह बताया है। अख़वानुल-मुसलेमीन ने शुक्रवार को जनता से अत्तहरीर स्क्वायर में जमा होने की अपील की है। अख़वानुल-मुसलेमीन ने शुक्रवार को सत्ता हस्तांतरण का दिन बताया है। याद रहे मिस्र की क्रांतिकारी जनता ने कई बार विरोध प्रदर्शन कर सैनिक परिषद के इस कदम की निंदा की है और सैनिक परिषद के इस्तीफे की मांग की है। मिस्र के लोगों का कहना है कि सैनिक परिषद अमरीका और ज़ायोनी शासन की पिठ्ठू है। अख़वानुल-मुसलेमीन के सदस्य मोहम्मद मुरसी मिस्र के इतिहास में पहले निर्वाचित राष्ट्रपति हैं।समाचार समाप्त......166