अहलेबैत समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार महान इस्लामी इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि दुश्मन यह जान ले कि ईरानी राष्ट्र से अनुचित उपेक्षाएं और अहंकार उसे कोई लाभ नहीं पहुंचा सकता।इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने देश के वरिष्ठ अधिकारियों और इस्लामी देशों के राजदूतों से मुलाकात में कहा कि शत्रु यह जान ले कि ईरानी राष्ट्र के सामने घमंड और अनुचित उपेक्षाओं से कुछ होने वाला नहीं है। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने आज सोमवार को पैग़म्बरे इस्लाम की बेअसत के अवसर पर होने वाली इस मुलाक़ात में ईरान और इस्लामी राष्ट्र को इस महान ईद की मुबारकबाद देते हुए ईरान के दुशमनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें ईरान की संयमी व संघर्ष करने वाली जनता के सामने अपनी पिछली पराजयों से सबक़ लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी समस्याओं की जड़, विश्व पर वर्चस्ववादी व्यवस्था का शासन तथा वर्चस्ववादी शक्तियों और वर्चस्व स्वीकार करने वालों की उपस्थिति है जिसका समाधान भी वर्चस्व से निकलने के लिए राष्ट्रों का संकल्प है। सुप्रीम लीडर ने कुछ क्षेत्रीय देशों में अत्याचारी शक्तियों के अमानवीय व अत्याचारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अत्याचारियों की दृष्टि में मनुष्य का कोई स्थान नहीं है और इसी प्रकार विश्व में आर्थिक संकट के दौरान भी स्पष्ट रूप से यह देखा जा सकता है कि वर्चस्ववादी शक्तियां, जनता से अधिक बैंकों और बड़ी बड़ी कंपनियों के मालिकों की समस्याओं के निदान का प्रयास कर रही हैं। सुप्रीम लीडर ने इस्लामी जगत में एकता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि एसे लोग भी हैं जो इस्लाम को मानते ही नहीं और न ही उन्हें इस्लाम के शीया और सुन्नी समूदायों के बारे में कोई ज्ञान है फिर वह वर्चस्वादी शक्तियों के खुफिया तंत्रों के संकेत पर शीया समुदाय के विस्तार पर चिंता प्रकट करते हैं और सांप्रदायिक झगड़ों को बढ़ावा देते हैं।इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने क्षेत्रीय राष्ट्रों की क्रांति को उनके मार्ग से विमुख करने की अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के प्रयासों की ओर संकेत करते हुए बल दिया कि विश्व के विभिन्न राष्ट्रों को अपने पैंरों पर खड़ा होकर ईश्वर पर भरोसा करते हुए वर्चस्ववादियों का मुक़ाबला और अपने भविष्य चयन स्वंय करना चाहिए। ........... 166
17 जून 2012 - 19:30
समाचार कोड: 323092
इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि दुश्मन यह जान ले कि ईरानी राष्ट्र से अनुचित उपेक्षाएं और अहंकार उसे कोई लाभ नहीं पहुंचा सकता।