ईरान के विरुद्ध अमरीका के इशारे पर योरोपीय संघ के प्रतिबंध को अपनाने से स्वीज़रलैंड के इंकार से अमरीका को मुंह की खानी पड़ी है। स्वीज़रलैंड में अमरीकी दूत एस बेयर ने कहा कि स्वीज़रलैंड के क़दम से वाशिंग्टन को निराशा हुई है। ज्ञात रहे अमरीका के दबाव में 23 जनवरी 20012 को योरोपीय संघ के विदेश मंत्री ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लेकर तेहरान पर दबाव डालने के लिए ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध और योरोपीय संघ के सदस्य देशों में ईरान के केन्द्रीय बैंक की संपत्ति को सील करने पर सहमत हुए। इस प्रतिबंध के 1 जुलाई से क्रियान्वित होने की संभावना है। स्वीज़रलैंड ने, जो न तो योरोपीय संघ का सदस्य है और न ही ईरान के विरुद्ध अमरीका की अगुवाई में पश्चिम के प्रतिबंधों को अपनाने के लिए क़ानूनी तौर से बाध्य है अब तक अमरीकी दबाव के सामने झुकने से इंकार किया है और इसे बाद में अपनाने के लिए कह रहा है। स्वीज़रलैंड ने इसी प्रकार ईरान के केन्द्रीय बैंक की संपत्ति को भी सील करने से अपवाद रखा है। जनेवा में बुधवार को अमरीकी दूत डोनल्ड बेयर ने पत्रकार सम्मेलन में कहाः हमने अपनी निराशा जताई। हम चाहेंगे कि स्वीज़रलैण्ड के अधिकारी इसे अपना लें। ज्ञात रहे अमरीका और उसके पश्चिमी घटक ईरान पर शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की आड़ में सैन्य कार्यक्रम चलाने के निराधार आरोप की आड़ में प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। जबकि ईरान की समस्त परमाणु गतिविधियां अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के अंतर्गत जारी हैं और ईरान, परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी पर हस्ताक्षर करने वाले देश के रूप में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के प्रयोग को अपना मूल अधिकार मानता है। ज्ञात रहे पश्चिम ईरान के विरुद्ध ऐसी स्थिति में निराधार आरोप लगा रहा है जब मध्यपूर्व में दो सौ परमाणु वारहेड्स से संपन्न ज़ायोनी शासन आईएईए को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति नहीं देता किन्तु पश्चिमी देश ज़ायोनी शासन से इस संदर्भ में कुछ नहीं कहते।..........166
10 जून 2012 - 19:30
समाचार कोड: 321319
ईरान के विरुद्ध अमरीका के इशारे पर योरोपीय संघ के प्रतिबंध को अपनाने से स्वीज़रलैंड के इंकार से अमरीका को मुंह की खानी पड़ी है।