9 जून 2012 - 19:30

बहरैनी और सऊदी सुरक्षा बलों ने शुक्रवार 8 जून को जहरीली गैस और आंसू गैस के गोले फेके थे और लोगों के घरों में घुस कर हिंसक कार्यवाही की थी

अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार आले खलीफ़ा शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान बहरैनी और सऊदी सुरक्षा बलों ने शुक्रवार 8 जून को जहरीली गैस और आंसू गैस के गोले फेके थे और लोगों के घरों में घुस कर हिंसक कार्यवाही की थी जिसके परिणाम स्वरूप अस्सी साल की एक बहरैनी महिला किजिसका नाम मरयम नासिर अब्दुल्ला था गंभीर रूप से घायल हो गई थी जिसने आज दम तोड़ दिया।14 फरवरी के क्रांतिकारी युवा एकता ने अपने बयान में बुजुर्ग महिला की शहादत की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि बहरैन पर काबिज आले सऊद और आले ख़लीफ़ा सुरक्षा बल गलियों में सामान्य गश्त करते हुए भी लोगों के घरों में जहरीली गैस के गोले फेंक कर मनोरंजन करते हैं, और उन्हें अंतर नहीं पड़ता कि जनता विरोध कर रहे हैं या गलियाँ और सड़कें सुनसान पड़ी हैं। वह लोगों के घरों में गोले फेंक कर खुश होते हैं और लगता है कि उनके सरगनाओं ने उनसे कहा है कि लोगों को यातना देने का कोई मौका हाथ से न जाने दें।प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार बहरैनी जनता राजधानी मनामा की सड़कों पर निकल आई और उसने इस शहादत पर ग़ुस्से का इज़हार करते हुए आले ख़लीफ़ा शासन से सत्ता छोड़ने की अपनी मांग दोहराई। ज्ञात रहे प्राप्त सूचना के आधार पर अमरीका ने आले ख़लीफ़ा शासन को ज़हरीले आंसू गैस के गोले मुहैया कराए हैं और आले ख़लीफ़ा शासन बहरैन की सत्ता पर 230 वर्षों से अधिक समय से क़ब्ज़ा जमाए हुए है। मनामा के निकट पुलिस और जनता के बीच हिंसक टकराव की भी रिपोर्ट है। कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा आक्रोषित जनता को तितर बितर करने हेतु शाटगन से फ़ायरिंग का उल्लेख किया गया है। ज्ञात रहे बहरैन में जनता मध्य फ़रवरी 2011 से आले ख़लीफ़ा शासन के अत्याचार के विरुद्ध निरंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है। बहरैनी जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर आले ख़लीफ़ा शासन की दमनात्मक कार्यवाही में अब तक बड़ी संख्या में लोग हताहत व घायल हुए हैं। आले ख़लीफ़ा शासन ने हज़ारों लोगों को केवल इसलिए नौकरियों से निकाल दिया है क्योंकि उन्होंने अपनी प्रजातांत्रिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लिया था। ............166