12 अप्रैल 2012 - 19:30

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन की ओर से किए जा रहे दमन के बावजूद इस देश में जनप्रदर्शन तेज़ हो गया है.........

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन की ओर से किए जा रहे दमन के बावजूद इस देश में जनप्रदर्शन तेज़ हो गया है। ज्ञात रहे बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन इस देश की सत्ता पर दो सौ तीस वर्षों से अधिक समय से क़ब्ज़ा जमाए हुए है। बहरैनी जनता आले ख़लीफ़ा के सत्ता से हटने व सुधार की मांग को लेकर पिछले वर्ष फ़रवरी से निरंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है।अलमनार टीवी चैनल के अनुसार बहरैनी सुरक्षा बलों ने जिन्हें अतिग्रहणकारी सउदी सुरक्षा बलों का समर्थन प्राप्त है, बहरैनी जनता के विरुद्ध दमनात्मक कार्यवाही तेज़ कर दी है। आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा बलों ने बक्तरबंद वाहनों से बहरैनी गांवों में जनता पर विषैले आंसू गैस के गोलों से आक्रमण किया जिसमे दसियों नागरिक घायल हुए हैं। दूसरी ओर विश्व के देशों व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने आले ख़लीफ़ा शासन से इस देश के मानवाधिकार कार्यकर्ता अब्दुल हादी ख़्वाजा को तुरंत रिहा करने की मांग की है। बहरैन में पिछले कई दिनों से जनता प्रदर्शन कर अब्दुल हादी ख़्वाजा और शैख़ हसन मुशैमा सहित आले ख़लीफ़ा की जेलों में बंद दूसरे राजनैतिक बंदियों की रिहाई की मांग कर रही है। बहरैन के मानवाधिकार कार्यकर्ता यूसुफ़ अलमुहाफ़िज़ा ने कहाः हम अब्दुल हादी ख़्वाजा, हसन मुशैमा सहित दूसरे राजनैतिक बंदियों की रिहाई के लिए प्रदर्शन जारी रखेंगे। इन दोनों व्यक्तियों की शारीरिक स्थिति बहुत बुरी हो गयी है जैसा कि अब्दुल हादी ख़्वाजा दो महीने से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं। इस बीच योरोपीय सूत्रों की रिपोर्टों के अनुसार बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा जनता की मांगों की अनदेखी के कारण बढ़ते जनप्रदर्शन के दृष्टिगत इस देश में दूसरे वर्ष भी फ़ॉर्मूला वन रैली आयोजित न होने की संभावना बढ़ गयी है।.........166