29 मार्च 2012 - 19:30

गत रात्रि राजधानी मनामा के दक्षिणी छोर के गावों में बहरैनी जनता ने व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किया........

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के सत्ता से हटने की मांग को लेकर जनप्रदर्शन जारी है। आले ख़लीफ़ा शासन बरहैन की सत्ता पर सन 1783 से क़ब्ज़ा जमाए हुए है। गत रात्रि राजधानी मनामा के दक्षिणी छोर के गावों में बहरैनी जनता ने व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किया। बहरैनी जनता ने राजनैतिक बंदियों की रिहाई और बंदियों का उत्पीड़न रोके जाने की मांग दोहराई। इस बीच बहरैन के राष्ट्रीय व प्रजातांत्रिक असोसिएशन के महासचिव फ़ाज़िल अब्बास ने बहरैन के संविधान में परिवर्तन को इस देश के संकट के समाधान का मार्ग बताया। फ़ाज़िल अब्बास ने बल दिया कि बहरैन के संकट का एकमात्र समाधान इस देश के संविधान का बहरैनी जनता के हित में संकलन है। उन्होंने बहरैनी जनता की इस देश के संविधान में परिवर्तन की इच्छा पर बल देते हुए कहा कि बहरैन के संविधान पर इस देश की जनता सहमत नहीं है और आले ख़लीफ़ा शासन ने इसे एकपक्षीय रूप से पारित करके जनता पर थोप रखा है। बहरैन के सबसे बड़े धड़े अलविफ़ाक़ ने भी बहरैन में नए संविधान के संकलन को आवश्यक बताया है। अलिवफ़ाक़ के एक नेता ख़लील अलमरज़ूक़ी ने बहरैन के सरकारी कार्यालयों की गतिविधियों पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस देश की स्थिति में सुधार के लिए नया संविधान बनाया जाए। दूसरी ओर पिछले कुछ दिनों के दौरान बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध जन प्रदर्शन में जनता ने इस देश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था के गठन की मांग दोहराई। प्रदर्शन कर रही जनता ने आले ख़लीफ़ा शासन के साथ हर प्रकार की वार्ता से इंकार किया है। बहरैन के राजनैतिक कार्यकर्ता यहया अलहदीद ने कहा कि आले ख़लीफ़ा शासन अपने सभी दमनात्मक हथकंडों के बावजूद बहरैनी जनता के संकल्प को तोड़ने की क्षमता नहीं रखता। उन्होंने बहरैनी सुरक्षा बलों व अतिग्रहणकारी सउदी अरब के सैनिकों को बहरैन में अशांति के लिए ज़िम्मेदार बताया और बल दिया कि बहरैनी सुरक्षा बलों व अतिग्रहणकारी सउदी अरब के सैनिकों के बहरैन के विभिन्न वर्गों के विरुद्ध अपराधों व बहरैन में सांप्रदायिक मतभेद को उभारने के कुप्रयासों के बावजूद इस देश की जनता का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। ज्ञात रहे बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध 14 फ़रवरी 2011 से आरंभ हुयी जनक्रान्ति के विरुद्ध इस शासन की दमनात्मक कार्यवाही में अब तक सैकड़ों आम नागरिक हताहत व घायल हो चुके हैं जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण हज़ारों लोगों को नौकरियों से निकाल दिया गया है। .........166