इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने एकता को इस्लामी राष्ट्रों की आवश्यकता बताया है। आज पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वआलेही वसल्लम तथा उनके पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस के अवसर पर इस्लामी देशों के राजदूतों और २५वें एकता सम्मेलन के आयोजकों से भेंट में आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लाम की इन दो महान हस्तियों के जन्म दिवस पर सबको बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस्लामी राष्ट्र पैग़म्बरे इस्लाम (स) के जीवन को आदर्श बनाकर और उसका अनुसरण करते हुए ही वास्तविक सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने एकता को इस्लामी राष्ट्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। वरिष्ठ नेता ने क्षेत्र के परिवर्तनों और क्षेत्र की क्रांतियों, राष्ट्रों की जागरूकता साथ ही वर्चस्ववादी शक्तियों विशेषकर अमरीका और ज़ायोनी शासन की निरंतर पराजय की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस्लामी जगत के लिए यह एक अद्वितीय अवसर है अतः उसे इससे अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि निःसन्देह, ईश्वर की कृपा से यह आन्दोलन जारी रहेगा और इस्लामी राष्ट्र अपने वैभव को पुनः प्राप्त करेगा। वरिष्ठ नेता ने इस्लामी क्रांति को पैग़म्बरे इस्लाम (स) के आन्दोलन का परिणाम बताया और कहा कि इस क्रांति से इस्लाम पुनर्जीवित हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्चस्ववादी शक्तियों के काल में जब यह शक्तियां समझ रही थीं कि उन्होंने इस्लाम प्रेम और आध्यात्म की आवाज़ उठने की संभावना को ही समाप्त कर दिया है एसे में इस्लामी क्रांति की एतिहासिक और सदा रहने वाली आवाज़ सुनाई दी जिसने शत्रुओं को भयभीत कर दिया जबकि इसने साथ ही जानकार एवं दूरदर्शी समर्थकों और मित्रों के भीतर आशा की किरण जगाई। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी क्रांति की आवाज़ को दबाने के लिए वर्चस्ववादी शक्तियों के समस्त जटिल षडयंत्रों एवं प्रयासों के बावजूद स्वर्गीय इमाम खुमैनी के नेतृत्व और ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध के परिणाम स्वरूप इस्लामी क्रांति सफल हुई जो दिन-प्रतिदिन प्रगति कर रही है। वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरानी राष्ट्र का ३३ वर्षीय प्रतिरोध और उसकी दृढता एसा उदाहरण है जो इस्लामी राष्ट्र तथा समस्त राष्ट्रों के सामने है और यह इनके लिए सीख बन सकता है। .....166
9 फ़रवरी 2012 - 20:30
समाचार कोड: 295873
वरिष्ठ नेता ने क्षेत्र के परिवर्तनों और क्षेत्र की क्रांतियों, राष्ट्रों की जागरूकता साथ ही वर्चस्ववादी शक्तियों विशेषकर अमरीका और ज़ायोनी शासन की निरंतर पराजय की ओर संकेत करते हुए कहा ......