25 दिसंबर 2011 - 20:30

लखनऊ के ऐतिहासिक, छोटे इमामबाड़े में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बेटी जनाबे सकीना की याद में, “यादे सकीना” का आयोजन हर साल की तरह इस साल भी मुहर्रम के अन्तिम रविवार (29 मुहर्रम) को किया गया....

भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के ऐतिहासिक, छोटे इमामबाड़े में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बेटी जनाबे सकीना की याद में, “यादे सकीना” का आयोजन हर साल की तरह इस साल भी मुहर्रम के अन्तिम रविवार (29 मुहर्रम) को किया गया। अन्जुमने गुलज़ारे पन्जतन की ओर से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का आरम्भ दोपहर तीन बजे हुई मजलिस से हुआ। मजलिस को मशहूर ज़ाकिरे अहलेबैत और मदरसा शिक्षा परिषद के पूर्व सदस्य मौलाना तक़ी रज़ा ने सम्बोधित किया। मजलिस के उपरान्त क़ैदख़ानए शाम का दिलसोज़ मंज़र पेश किया गया जिसे देखकर अज़ादार अपने आँसू न रोक सके। इसके बाद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की सवारी का प्रतीक ज़ुलजनाह, हज़रत अब्बास की निशानी अलम, जनाबे अली असग़र का गहवारा, चौथे इमाम का शबीहे ताबूत और अन्य तबर्रूकात की ज़ियारत अक़ीदत मंदों को कराई गयी। इस अवसर पर ठंड के बावुजूद बड़ी संख्या में बच्चों, नौजवानों, बूढ़ों और महिलाओं ने शिरकत की। ज़ियारत के बाद शहर की विभिन्न मातमी अन्जुमनों ने नौहा ख़्वानी व सीनाज़नी करते हुए इमामबाड़ा परिसर में गश्त किया जिसके उपरान्त जुलूस समाप्त हुआ। इसके बाद रात 9 बजे इमामबाड़े में एक मजलिस हुई जिसको मौलाना ज़की बाक़िरी ने सम्बोधित किया।  इसके अतिरिक्त कर्बला के शहीदों के बीसवें के सिलसिले में विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिसों का आयोजन हुआ। इसी सिलसिले में हरदोई रोड, सरफ़राज़गंज स्थित रौज़ए अली में एक मजलिस नमाज़े मग़रिबैन के बाद हुई, इस मजलिस को मौलाना अमीर हैदर ने सम्बोधित किया। हाता मिर्ज़ा अली खाँ में हुई मजलिस को मौलाना कल्बे जवाद तथा कर्बला दियानुद्दौला में मौलाना अतहर अब्बास ने सम्बोधित किया।

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