भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर में अल-इमाम चैरीटेबल फ़ाउन्डेशन के तत्वाधान में चौथे इमाम, इमामे ज़ैनुल आबेदीन (अ.) की शहादत के सिलसिले में होने वाली ख़मसा मजालिस की आख़िरी मजलिस को सम्बोधित करते हुए मौलाना जलाल हैदर हल्लौरी ने कहा कि जब कभी, कहीं भी मजलिसे अज़ा का आयोजन होता है तो सबसे पहले क़ुरान की तिलावत होती है, शरियते इस्लाम बयान की जाती है तथा मजलिसे हुसैन के माध्यम से इस्लाम का सही प्रचार प्रसार सम्भव हो सकता है उन्होने कहा कि अगर इन्सान शरियत के नियमों का पालन करना प्रारम्भ कर दे तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं मिटा सकती है। फ़ज़ाएले अहलेबैत के बाद मौलाना ने इमाम पर हुए अत्याचारों का वर्णन किया। नवाबों के शहर लखनऊ में इमाम के ग़म में मजलिसों का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। इसी सिलसिले में यौमे बीमारे कर्बला कमेटी की ओर युनिटी कालेज, हुसैनाबाद के पास स्थित मस्जिद में एक मजलिस हुई जिसको मौलाना वसी ने सम्बोधित किया। मजलिस के बाद ज़हरा कालोनी, बड़ाबाग़ में हुई तक़रीर को जनाब क़ैसर जौनपूरी ने अपने विशेष अन्दाज़ में सम्बोधित करते हुए चौथे इमाम पर हुए मसाएब बयान किए तो अज़ादार अपने आंसू न रोक सके। इसके उपरान्त सुल्तानपुर, जौनपुर, बाराबंकी. सीतापुर व बरेली से आयीं अन्जुमनों ने नौहाख़ानी व सीनाज़नी की। इसी सिलसिले में झारखण्ड के पूर्व राज्यपाल सय्यद सिब्ते रज़ी के लखनऊ स्थित आवास पर भी एक मजलिस का आयोजन किया गया जिसे मदरसा जामिया नाज़मियां के प्रधानाचार्य मौलाना हमीदुल हसन ने सम्बोधित किया।
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