27 नवंबर 2011 - 20:30

शाही ज़रीह का जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होता हुआ छोटे इमामबाड़े की ओर चल दिया

हर साल की तरह इस साल भी लखनऊ में हुसैनाबाद एण्ड एलाइड ट्रस्ट की ओर से पहली मुहर्रम को मोम की शाही ज़रीह का जुलूस बड़े इमामबाड़े से बड़ी ही अक़ीदत व एहतेराम के साथ ग़मगीन माहौल में  निकाला गया। जुलूस से पहले हुई मजलिस को मौलाना मुहम्मद अली हैदर ने सम्बोधित किया। मौलाना ने कहा कि इस्लाम अमन, अमल, किरदार, इत्तेहाद व सलामती का नाम है। फ़जाएल के बाद उन्होने जब कर्बला के शहीदों के मसाएब बयान किये तो लोग अपने ऑसू न  रोने सके। मजलिस के बाद लगभग 6 बजे शाही ज़रीह का जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होता हुआ छोटे इमामबाड़े की ओर चल दिया। जुलूस में सबसे आगे हुसैनाबाद ट्रस्ट का बैनर था उसके पीछे जुलूस अपने शाही अन्दाज़ से चल रहा था और साथ ही लखनऊ की मशहूर अन्जुमन, अन्जुमने शब्बीरया नौहा ख़्वानी व सीना ज़नी कर रही थी। जुलूस अपने पूर्व निर्धारित मार्ग रूमी गेट, नींबू पार्क तथा घण्टाघर के सामने से होता हुआ रात लगभग 10 बजे हुसैनाबाद स्थित छोटे इमामबाड़े पहुँचकर समाप्त हुआ, जहां अक़ीदतमंदों ने देर रात रक ज़रीह की ज़ियारत की और दुआएं मांगी। इस वर्ष पहली बार जुलूस का सीधा प्रसारण हुसैनी चैनल के द्रारा टेलीवीज़न पर किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों ने शिरकत की। जुलूस के साथ-साथ हुसैनाबाद ट्रस्ट के चेयरमैन, ज़िलाधिकारी अनिल कुमार सागर, डी. आई. जी. ध्रुवकांत ठाकुर, ट्रस्ट के सचिव अपर ज़िलाधिकारी ओम प्रकाश पाठक सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी थे।

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