भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी की अली सोसाइटी ने हज़रत अली (अ.) की सीरत पर चर्चा करने के लिए, अली-डे का आयोजन किया जिसमें विभिन्न वक्ताओं नें हज़रत अली के हवाले से लोगों को अमन व इन्साफ़ का पैग़ाम दिया। कोलकाता से तशरीफ़ लाए मौलाना सय्यद अतहर अब्बास ने याद दिलाया कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.) नें हज़रत अली (अ.) को बाबे-इल्म कहा था। सर सय्यद का ज़िक्र करते हुए मौलाना ने कहा कि शायद यही कारण था कि जब सर सय्यद नें हिन्दुस्तान में नवीन ज्ञान के प्रचार-प्रसार का निर्णय लिया तो उन्होने अपनी शैक्षिक नीति को आगे बढ़ाने के लिए अलीगढ़ को चुना। उन्होने कहा कि हिन्दुस्तानी मुसलमानों का यह धार्मिक कर्तव्य है कि वह हर तरह के हालात में स्वयं तथा अपने समाज शिक्षा के माध्यम से ताक़तवर बनाएं। उन्होने मुसलमानों से देश के विकास में हिस्सा लेने की अपील भी की और कहा कि यह शिक्षा के विकास से ही सम्भव हो सकेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे, अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के वॉयस चांसलर प्रोफ़ेसर जावेद अख़्तर ने कहा कि हज़रत अली ने न सिर्फ़ इस्लामी दुनिया बल्कि तमाम आलमे इन्सानियत को एक पुरअमन एवं भाईचारे से युक्त निज़ाम से परिचित कराया। उन्होने हज़रत अली के पैग़ाम का हवाला देते हुए कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हज़रत अली ने कहा था कि हमें अपने अन्दर मोहब्बत व अमन को बढ़ावा देना चाहिए और मुसलमानों एवं ग़ैर मुस्लिमों से एक सा बर्ताव करना चाहिए। ..........166