सीरिया के विरुद्ध सुरक्षा परिषद से प्रस्ताव पारित करने के लिए अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और पुर्तगाल के चार महीनों के जारी प्रस्ताव अन्ततः विफल हो गये। कल सुरक्षा परिषद में सीरिया के विरुद्ध पेश किये गये इस प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो कर दिया। अमरीका और युरोपीय देशों द्वारा पेश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि सीरिया में सरकार ने प्रदर्शनकारियों के कथित दमन पर तत्काल रोक नहीं लगाई तो उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी। प्रस्ताव पर मतविभाजन के दौरान भारत ब्राजील, लेबनान और दक्षिण अफ्रीका उपस्थिति नहीं रहे। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नाइजेरिया, कोलंबिया और बोस्निया-हर्जे़गोविना ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थाई प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि विश्व समुदाय की कार्यवाहियां ऐसी हों जिनसे सीरिया सरकार और विपक्ष के साथ वार्ता में सहायता मिले और प्रतिबंध एवं सत्ता परिवर्तन की धमकियों से परिस्थितियों को जटिल बनाने की बात न की गयी हो। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रस्ताव में सीरियाई विपक्ष द्वारा की जाने वाली हिंसा की निंदा नहीं की गयी और न ही प्रस्ताव में सीरिया में विपक्ष पर हिंसा का परित्याग करने और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी शिकायतों के निवारण के लिए देश के प्रशासन के साथ वार्ता करने की कोई जिम्मेदारी डाली गई थी। याद रहे सीरिया क्षेत्र में इस्राईल विरोधी मोर्चे का महत्वपूर्ण देश है जिसके कारण उसे पश्चिम विशेषकर अमरीका की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों का सामना करना पड़ता है।
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