19 मार्च 2011 - 20:30

बहरैन के सैन्य न्यायालय के आदेश जारी होने के एक दिन बाद देश विदेश में इसका विरोध बढ़ गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश जनता को भयभीत करने के लिए है....

बहरैन के सैन्य न्यायालय के आदेश जारी होने के एक दिन बाद देश विदेश में इसका विरोध बढ़ गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश जनता को भयभीत करने के लिए है और साथ ही उन्होंने कहा है कि इस आदेश के कारण आलेख़लीफ़ा शासन का तख़्ता उलटने के लिए जनता का संकल्प सुदृढ़ होगा। बहरैनी राष्ट्र के समर्थक कांग्रेस के सदस्य क़ासिम हाशमी ने अलआलम टीवी से साक्षात्कार में कहा कि प्रदर्शनकारियों के संबंध में आलेख़लीफ़ा शासन की ओर से जारी किया गया आदेश जनक्रांति पर प्रभावित नहीं होगा बल्कि यह आग में घी का काम करेगा। एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने भी अपने बयान में न्यायालय की सात मिनट की कार्यवाही की ओर संकेत करते हुए बल दिया कि बहरैन की सैन्य न्यायालय ने सात मिनट की कार्यवाही के दौरान चिकित्सकों और डाक्टरों को सरकार गिराने के आरोप में 15 वर्ष के कारावास का दंड दिया। एमेन्स्टी इन्टरनेश्नल संस्था में उत्तरी अफ़्रीक़ा और मध्यपूर्व मामलों के प्रबंध फ़िलिप लोटर ने एक बयान में कहा कि यह आरोप उन लोगों पर बहुत की मूर्खतापूर्ण है जिन्होंने बहुत कठिन परिस्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी निभाई। उन्होंने कहा कि बहरैनी अधिकारियों से बारम्बार मांग की है कि शिक्षकों, चिकित्सकों सहित अन्य नागरिकों पर सैन्य न्यायालय में मुक़द्दमा न चलाया जाए, मुझे लगता है कि बहरैनी सरकार जनता को यह संदेश देना चाहती है कि जो भी राजनैतिक सुधार की मांग करेगा उससे कड़ाई से निपटा जाएगा। दूसरी ओर बहरैन की तानाशाही व्यवस्था के विरुद्ध जनप्रदर्शन जारी हैं और जनता ने बल दिया है कि आले ख़लीफ़ा की तानाशाही सरकार लोगों का दमन करके, एक गुट को दूसरे गुट के विरुद्ध उकसा कर और इसी प्रकार शीया- सुन्नी मुसलमानों के मध्य फूट डाल कर तथा आपत्ति व प्रदर्शन करने वाले लोगों के विरुद्ध नाना प्रकार के हथियारों का प्रयोग करके लोकतंत्र की मांग करने वाले लोगों की आवाज़ को दबाना चाहती है परंतु उसकी इन कार्यवाहियों का कोई परिणाम नहीं निकलेगा क्योंकि आले ख़लीफा की तानाशाही सरकार को उखाड़ फेकने हेतु लोगों का संकल्प और मज़बूत हो गया है।

समाचार समाप्त

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