26 अगस्त 2011 - 19:30

ब्रिटेन में हालिया हिंसक प्रदर्शनों में भाग लेने वालों में से लगभग 62 प्रतिशत जेल में बंद लोगों में से केवल दस प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने गंभीर अपराध किए हैं

ब्रिटेन में हालिया हिंसक प्रदर्शनों में भाग लेने वालों में से लगभग 62 प्रतिशत जेल में बंद लोगों में से केवल दस प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने गंभीर अपराध किए हैं। बाक़ी गिरफ़्तार लोगों ने किसी प्रकार का गंभीर अपराध नहीं किया है किन्तु उन्हें अज्ञात समय के लिए जेल में बंद रखा गया है। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि ब्रितानी सरकार ने सभी गिरफ़्तार किए गए लोगों को मुक़द्दमे तक जेल में रखने का निर्णय किया है। ब्रिटेन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को इस बात की चिंता सताए जा रही है कि गिरफ़्तार लोगों में से केवल दस प्रतिशत लोगों को गंभीर अपराध का दोषी ठहराया गया है जबकि बाक़ी ज़मानत या बिना ज़मानत के रिहा हो जाएंगे। दूसरी ओर ब्रिटेन की गठबंधन सरकार में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही को लेकर मतभेद उभर कर सामने आए हैं। ब्रिटेन के पूर्व लिबरल डेमोक्रेट नेता सर मेन्ज़ीस कैंप्बेल ने ब्रितानी प्रधान मंत्री डेविड कैमरन के उस बयान को रद्द कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मानवाधिकार का विकृत अर्थ ब्रिटेन में अभूतपूर्व अशांति का कारण बना। कैंप्बेल ने हर उस क़दम की ओर से डेविड कैमरन को सचेत किया है जिससे ब्रिटेन की मानवाधिकार पर प्रतिबद्धता पर प्रश्न उठे। कैंप्बेल ने कहा कि ब्रिटेन में अशांति से निपटना कैमरन के मानवाधिकार क़ानून में हस्तक्षेप की भूमिका न बने जिसमें योरोप के मानवाधिकार क़ानून को स्थान दिया गया है। ब्रिटेन में टकराव व चिंता की स्थिति इसलिए है क्योंकि मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि गिरफ़्तार लोगों को बिना मुक़द्दमे के अज्ञात समय के लिए जेल में रखना मानवाधिकार के हनन नमूना है और इन संगठनों ने ब्रितानी सरकार से अपील की है कि वह गिरफ़्तार लोगों को उनके दोष व अधिकारों से सूचित करे।
समाचार समाप्त
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