जब से ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने रमज़ान के पवित्र महीने के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस का नाम दिया है लगभग तीन दहाईयां गुज़र चुकी हैं और इन तीन दहाईयों में संसार भर के उत्पीड़ितों ने लगातार जायोनी शासन के अत्याचारों और कुकर्मों की भर्त्सना की है और इस्राईल से अपनी घृणा का एलान किया है और उनके पिठ्ठू शासकों की नाबूदी के इच्छुक रहे हैं जो राष्ट्र की सम्पति को लुटा रहे हैं और दिश्मन को लाभ पहुँचा रहे हैं।परन्तु वर्तमान समय में स्थिति कुछ और है आज से तीस साल पहले ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने जागरूकता को जो बीज राष्ट्र के दिल में बोया था आज तनावर पेड़ का रूप ले चुका है। आज क्षेत्र के तानाशाह एक के बाद एक गद्दी छोड़ने पर मजबूर हैं जिनमें से कुछ विस्थापित अवस्था में दूसरे देशों में जीवन व्यवतीत कर रहे हैं और कुछ सिलाखों के पीछे अपने कुकर्मों के परिणाम के प्रतीक्षक हैं और कुछ निराशा की स्थिति में अपने शासन को बचाने के लिए हर प्रकार के अत्याचार को अंजाम दे रहे हैं....जारी...
24 अगस्त 2011 - 19:30
समाचार कोड: 261878
जब से ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने रमज़ान के पवित्र महीने के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस का नाम दिया है लगभग तीन दहाईयां गुज़र चुकी हैं .......