11 अगस्त 2011 - 19:30

बहरैन में क़तर के राजदूत अब्दुल्लाह आले सानी की आले ख़लीफ़ा शासन के विदेश मंत्री की ओर से लगाए गए आरोप पर प्रतिक्रिया मनामा-दोहा संबंधों में तनाव बढ़ने का कारण बनी है

बहरैन में क़तर के राजदूत अब्दुल्लाह आले सानी की आले ख़लीफ़ा शासन के विदेश मंत्री की ओर से लगाए गए आरोप पर प्रतिक्रिया मनामा-दोहा संबंधों में तनाव बढ़ने का कारण बनी है। कुछ ही दिन पूर्व क़तर के टीवी चैनल अलजज़ीरा अंग्रेज़ी ने बहरैन में शासन के विरुद्ध जनता के निरंतर व्यापक प्रदर्शन और इस देश के अधिकारियों की ओर से मानवाधिकार के उल्लंघन से संबंधित एक पचास मिनट की डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म प्रसारित की। इस फ़िल्म के प्रसारण के पश्चात बहरैनी शासक ने इस देश के विदेश मंत्रालय को क़तर के साथ संबंध विच्छेद का आदेश जारी कर दिया। बहरैनी समाचार पत्रों ने भी इस देश की सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए इस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म को जाली फ़िल्म की संज्ञा दी और लिखा कि अलजज़ीरा टीवी चैनल बहरैनी सरकार की छवि ख़राब करने और इस सरकार पर मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाने का प्रयास कर रहा है। बहरैन के विदेश मंत्री शैख़ ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा ने भी इस फ़िल्म के प्रसारण पर प्रतिक्रिया स्वरूप अपनी साइट पर लिखाः अंग्रेज़ी अलजज़ीरा से प्रसारित फ़िल्म यह दर्शाती है कि क़तर में ऐसे लोग हैं जो बहरैन का भला नहीं चाहते और इन लोगों की हमारे विरुद्ध शत्रुता समझ में न आने वाली बात है।इस बीच मनामा में क़तर के राजदूत अब्दुल्लाह आले सानी की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच कूटनैतिक तनाव में जलती में घी का काम किया। क़तर के राजदूत अब्दुल्लाह आले सानी ने अपने देश के विरुद्ध बहरैनी विदेश मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया स्वरूप कहाः यदि आप सही हैं तो अलजज़ीरा चैनल से फ़िल्म के प्रसारण पर भयभीत क्यों हैं। क़तर के राजदूत ने कहाः हम बहरैन में अपने देश के दूतावास के सामने क़तर के ध्वज जलाए जाने पर चुप रहे। फ़ार्स खाड़ी सहकारिता परिषद के सदस्य देशों में क़तर भी उन देशों में है जिसने बहरैन में प्रदर्शनकारियों के दमन का समर्थन नहीं किया और इसी कारण उसने सउदी अरब और संयुक्त अरब इमारात का अनुसरण न करते हुए बहरैन अपनी सेना नहीं भेजी। क़तर और बहरैन के बीच हालिया कूटनैतिक तनाव से फ़ार्स खाड़ी सहकारिता परिषद के सदस्य देशों के बीच मौजूद तनाव बढ़ गया है।