11 अगस्त 2011 - 19:30

आयतुल्ला हिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कल रात तेहरान में छात्रों तथा वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भेंट में विश्व की क्रांतियों के दिगभ्रमित होने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा है कि ईरानी राष्ट्र की महाक्रांति, स्पष्ट लक्ष्यों के साथ अस्तित्व में आई और इतिहास में एक अपवाद के रूप में यह अब भी अपने सही मार्ग से विचलित हुए बिना उन्हीं लक्ष्यों और मूल्यों की ओर बढ़ रही है। आयतुल्ला हिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कल रात तेहरान में छात्रों तथा वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भेंट में विश्व की क्रांतियों के दिगभ्रमित होने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए इस्लामी क्रांति की सुदृढ़ता का उल्लेख किया। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लाम का बोलबाला, वर्चस्व का विरोध, स्वावलंबल की रक्षा, अत्याचार ग्रस्तों की सुरक्षा और हर क्षेत्र में ईरान की प्रगति एवं विकास ईरान की इस्लामी क्रांति के मुख्य लक्ष्य हैं।वरिष्ठ नेता ने क्रांति की पहली पीढ़ी की तुलना में ईरान के छात्रों की नई पीढ़ी की बातों और मांगों को सुदृढ, गंभीर और प्रगतिशील बताते हुए कहा इस समय के युवा की भावनाएं इस्लामी क्रांति के काल के युवाओं की भावनाओं की ही भांति हैं जो बहुत महत्वपूर्ण बात है। आयतुल्ला ख़ामेनेई ने इस्लामी क्रांति के स्वावलंबन और उसकी सुदृढ़ता को स्पष्ट करते हुए पिछली कुछ शताब्दियों के दौरान विश्व में आने वाली जनक्रांतियों का उल्लेख किया। वरिष्ठ नेता ने कहा कि फ़्रांस की महाक्रांति, विश्व की बड़ी जनक्रांतियों का एक उदाहरण थी जो तत्कालीन राजशाही व्यवस्था के विरूद्ध आई थी किंतु यह धीरे-धीरे अपने आरम्भिक लक्ष्यों से दूर होती चली गई और विभिन्न प्रकार की कठिनाइयां सहन करने के पश्चात फ़्रांस में पुनः राजशाही व्यवस्था लागू हुई। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अमरीका की स्वतंत्रता और इस देश के गठन को जनान्दोलन का एक अन्य उदाहरण बताया जो लंबे समय से अपने आरम्भिक लक्ष्यों से दिगभ्रमित होकर आंतरिक कलेश की भेंट चढ़ चुका है। वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार उत्तरी अफ़्रीक़ा और लैटिन अमरीका में ५० के दशक के अंत और ६० के दशक के आरंभ में आने वाली कुछ छोटी क्रांतियों को भी अपने आरम्भिक लक्ष्यों से भटकने वाली क्रांतियों की सज्ञा देते हुए स्पष्ट किया कि इस्लामी क्रांति, पिछली कुछ शताब्दियों के दौरान एक अपवाद है क्योंकि यह शक्ति, एकता, एकजुटता और प्रभुल्लता के साथ अपने आरम्भिक लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है।समाचार समाप्त.......166