भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार संसद की एक समिति ने मुसलमानों के कल्याण से सम्बन्धित सच्चर समिति की सिफ़ारिशों के क्रियान्वयन में त्रुटियां पाई हैं और सुझाव दिया है कि सरकार को सिफ़ारिशों पर समय पर अमल करने के लिए एक क़ानून बनाना चाहिए। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मामलों की संसद की स्थाई समिति ने अपनी 17वीं रिपोर्ट में कहा कि मौलाना आज़ाद फ़ाउन्डेशन के तहत अल्पसंख्यक समुदाय को वित्तीय मदद देने और उनके लिए छात्रव्रत्ति की योजनाओं को छोड़कर सलमान ख़ुर्शीद के नेत्रत्व में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय सच्चर समिति की रिपोर्ट में बताई गई समस्याओं को दूर करने में ध्यान नहीं दे रहा है। समिति ने पाया कि सिफ़ारिशों पर अमल सुनिश्चित कराने के लिए अगर कोई क़ानूनी शक्ति होगी तो सिफ़ारिशों का क्रियान्वयन पुरज़ोर तरीक़े से हो सकता है। समिति ने कहा, इसलिए समिति चाहती है कि मंत्रालय को इस संबंध में संसद में एक क़ानून लाने की दिशा में काम करना चाहिए। सच्चर समिति की सिफ़ारिशों पर फ़ैसले को अधिक तरजीह दिए जाने के सरकार के दावों को ख़ारिज करते हुए बसपा सांसद दारा सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने कहा कि सिफ़ारिशों को गम्भीरता से लागू नहीं किया जा रहा है। इस सम्बंध में संसद में 4 अगस्त को रिपोर्ट पेश की गई थी।  ........166