पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस की पावन बेला पर आपकी सेवा में हार्दिक बधाई प्रस्तुत करते हैं।
आज १५ शाबान का शुभ अवसर है। सन २५५ हिजरी क़मरी में १५ शाबान को हज़रत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम की फूफी जनाब हकीमा उनके घर आयीं ताकि अपने परिजनों से भेंट करें। जनाब हकीमा जब लौटने का इरादा करती हैं तो इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम उनसे कहते हैं" फूफी जान आज रात्रि हमारे पास रहें, इस पर जनाब हकीमा कहती हैं, आज हमने आपको काफी कष्ट दिया। इमाम कहते हैं आज रात्रि हमारे यहां बेटा होगा कि महान ईश्वर ज़मीन को उसके ज्ञान, ईमान और मार्गदर्शन से भर देगा जबकि ज़मीन अत्याचार एवं अन्याय से भर चुकी होगी। जनाब हकीमा उस समय खुशी के साथ आश्चर्य भरे नेत्रों से पूछती हैं यह मुबारक शिशु नरजिस से होगा? इमाम ने कहा जी हां।
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