9 जुलाई 2011 - 19:30

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च धार्मिक नेता हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने महदवीयत के संबंध में आस्था तथा उसकी प्रतीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा अगर महदवीयत न होती तो ईशदूतों के सभी प्रयास व्यर्थ हो जाते।

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च धार्मिक नेता हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने महदवीयत के संबंध में आस्था तथा उसकी प्रतीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा अगर महदवीयत न होती तो ईशदूतों के सभी प्रयास व्यर्थ हो जाते।

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई आज तेहरान में महदवीयत के विषय के विशेषज्ञों, अध्ययनकर्ताओं और लेखकों की सभा को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि सभी ईश्वरीय धर्मों में महदवीयत की वास्तविकता के बारे में बातें बयान की गयी हैं लेकिन यह विषय इस्लाम के स्पष्ट व सिद्ध सिद्धांतों में से है।

उन्होंने महदवीयत के संबंध में आस्था तथा उसकी प्रतीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस विषय पर गहन वैचारिक एवं बौद्धिक काम किया जाना चाहिए तथा अज्ञानतापूर्ण एवं तथ्यों से रिक्त विचारों से बचना चाहिए। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने महदवीयत संबंधी आस्था को धर्म के मूल सिद्धांतों का भाग बताया।

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