आयतुल्लाह जन्नती ने अमरीका व ज़ायोनी शासन को आतंकवाद का समर्थक बताया है।आज तेहरान की केंद्रीय नमाज़े जुमा आयतुल्लाह अहमद जन्नती की इमामत में अदा की गई। उन्होंने नमाज़े जुमा के ख़ुत्बों में तेहरान में आतंकवाद से संघर्ष की अंतर्राष्ट्रीय कान्फ़्रेंस के आयोजन की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस कान्फ़्रेंस ने आतंकवाद से संघर्ष के संबंध में काफ़ी वास्तविकताएं प्रस्तुत कीं और अमरीका व ज़ायोनी शासन आतंकवाद के समर्थक भी हैं और आतंकवाद के पोषक भी । उन्होंने इसी प्रकार अफ़ग़ानिस्तान व इराक़ सहित कुछ क्षेत्रीय देशों में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति की आलोचना करते हुए कहा कि अमरीका, अपने हितों की पूर्ति और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए कुछ देशों में सैनिक उपस्थिति बनाए हुए है जिसके परिणाम स्वरूप केवल निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। आयतुल्लाह जन्नती ने लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या की जांच करने वाले अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्युनल के आरोप पत्र की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस आरोप पत्र के जारी होने के पीछे अमरीका व इस्राईल का हाथ है क्योंकि वे लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन से 33 दिवसीय युद्ध का प्रतिशोध चाहते हैं किंतु हिज़्बुल्लाह अत्यंत सशक्त एवं अजेय है। उन्होंने कहा कि रफ़ीक़ हरीरी ट्रिब्युनल का आरोप पत्र दूसरों के आदेश पर तैयार किया गया है और यह ट्रिब्युनल अमरीका व इस्राईल के लिए काम कर रहा है। तेहरान की नमाज़े जुमा के इमाम ने इसी प्रकार बहरैन की स्थिति की ओर संकेत करते हुए इस देश में होने वाले अपराधों पर विश्व समुदाय के मौन की आलोचना की और कहा कि बहरैन के लोगों का अपराध यह है कि वे अपने भविष्य के बारे में स्वयं निर्णय करना चाहते हैं। उन्होंने बहरैन में शांति स्थापना के लिए वार्ता हेतु तैयारी की सरकार की घोषणा को, जनता की वास्तविक मांगें स्वीकार न करने के संबंध में आले ख़लीफ़ा सरकार की चाल बताया और कहा कि इस देश से सऊदी अरब के सैनिकों को तत्काल बाहर निकल जाना चाहिए।
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