भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) पत्रकार की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने मोअल्लिम डिग्री धारकों को बी0 टी0 सी0 का दर्जा देने की घोषणा की है जिससे उन्हें उर्दू अध्यापकों के पदों पर नियुक्त किया जा सकेगा। इस फ़ैसले से प्रदेश के क़रीब दस हज़ार से ज़्यादा मोअल्लिम डिग्री धारकों को लाभ होगा। राज्य सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस लेने का फ़ैसला भी किया है। चुनावी वर्ष में सरकार की इस पहल को खासा महत्पूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश के मोअल्लिम-ए-उर्दू डिग्री धारकों को 1997 तक मोअल्लिम-ए-उर्दू प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को बी0 टी0 सी0 प्रशिक्षण की समकक्षता दी जाती थी इसके बाद राज्य सरकार ने इस समकक्षता को समाप्त कर दिया था।
मोअल्लिम-ए-उर्दू डिग्री धारक लगातार मांग कर रहे थे कि उन्हें बी0 टी0 सी0 की समकक्षता दी जाए और जो अभ्यर्थी 1997 से पहले प्रशिक्षण ले चुके हैं उन्हें बेसिक शिक्षा परिषद के विद्धालयों में उर्दू शिक्षकों के पद पर भर्ती किया जाए परन्तु सरकार इसकी अनुमति नहीं दे रही थी। कुछ दिन पहले उन्होंने लखनऊ में प्रदर्शन कर बी0 टी0 सी0 का दर्जा देने की सरकार से मांग की थी। हाईकोर्ट ने भी इस सम्बंध में वर्ष 1997 के पहले प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों को भी समकक्ष माना था लेकिन सरकार ने इसके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अनुज्ञा याचिका दायर की थी।
मुख्यमंत्री मायावती ने सुप्रीमकोर्ट में दायर याचिका को वापस लेने का फ़ैसला किया है। इसी के साथ मोअल्लिम डिग्री धारकों के बेसिक शिक्षा स्कूलों में शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के मुसलमानों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है।