20 जून 2011 - 19:30

सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान में हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को सोमवार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामे पर ट्रस्ट को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान में हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को सोमवार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामे पर ट्रस्ट को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।हलफनामे पर जवाब तलब जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस एके पटनायक की वेकेशन बेंच ने ट्रस्ट की दिल्ली शाखा के अध्यक्ष आचार्य वीरेंद्र विक्रम से दिल्ली पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता के हलफनामे पर जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि वह दूसरे पक्ष को भी सुनना चाहता है, क्योंकि उन्हें भी अपना पक्ष पेश करने के लिए मौका दिया जाना चाहिए। बेंच ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित से कहा कि पुलिस ने रामदेव और उनके समर्थकों पर हलफनामे में कई आरोप लगाए हैं। ऐसे में दूसरे पक्ष के रुख को भी सुना जाना चाहिए। अदालत इस मामले पर 11 जुलाई को अगली सुनवाई करेगी।बल प्रयोग नहीं किया गयादिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा था कि रामदेव के समर्थकों के हिंसक होने और पथराव शुरू करने के बाद उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के आठ गोले छोड़े गए। लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया गया। अपनी कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराते हुए पुलिस ने कहा था कि अधिकारियों ने रामदेव को केवल योग शिविर चलाने के लिए मैदान के इस्तेमाल की इजाजत दी थी जबकि रामदेव योग शिविर चलाने की बजाए भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर मैदान में मौजूद 20 हजार से ज्यादा लोगों को उकसा रहे थे। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस से रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की वजह पूछी थी जिसके बाद दिल्ली पुलिस की ओर से यह हलफनामा दाखिल किया गया था। पुलिस के अनुसार रामलीला मैदान की कार्रवाई में 72 लोग घायल हुए हैं जिनमें 39 नागरिक और 23 पुलिसकर्मी हैं।