17 जून 2011 - 19:30

भारत के सीनियर बल्लेबाज राहुल द्रविड़ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 15 वर्ष खेल चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि वह अब भी सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा लेते हैं। द्रविड़ ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास सत्र में हिस्सा लिया।

तेंदुलकर के साथ 19 टेस्ट शतकीय साझेदारियां निभा चुके द्रविड़ ने कहा, वह [सचिन] हमेशा से शानदार खेलता आए हैं, पिछले दो-तीन वर्षों में तो बेहतरीन खेल रहे हैं जो शायद उनकी जिंदगी की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी है। द्रविड़ ने कहा, जब मैं आया था तो वह सात साल से खेल रहे थे। वह 1997 में वेस्टइंडीज में मेरे कप्तान थे और प्रेरणा का स्रोत थे। इस पे्ररणा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगा जो सोमवार से शुरू होगी और इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ चार टेस्ट खेलने हैं। द्रविड़ 52.44 के औसत से 150 मैचों में 12,063 टेस्ट रन बनाकर सर्वकालिक तीसरे सर्वश्रेष्ठ रन स्कोरर हैं। वह एकमात्र ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने सभी 10 टेस्ट खेलने वाले देशों के खिलाफ कम से कम एक शतक जड़ा है। उन्होंने कहा, मुझे टेस्ट से सात महीने का आराम मिला। लेकिन मैं इन लगातार सात टेस्ट के बारे में जानता था और अपनी तैयारियों के लिए तैयार था।

द्रविड़ के मुताबिक, आप जानते हो कि आपने काफी कुछ किया है लेकिन तब भी कुछ दबाव रहता है। आप अब भी नर्वस महसूस करते हो। इन चीजों में बदलाव नहीं होता। द्रविड़ को इस युवा टीम से काफी अपेक्षाएं हैं जिसकी अगुवाई करिश्माई कप्तान महेंद्र सिंह धौनी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, धौनी बहुत अच्छे कप्तान साबित हुए हैं। वह शांत रहते हैं और टेस्ट, आईपीएल या वनडे में उनका रिकार्ड शानदार रहा है। दबाव के क्षणों में शांत रहने की उनकी काबिलियत कमाल की है। टीम खुशकिस्मत है कि उसके पास ऐसा कप्तान है। द्रविड़ को भली भांति इल्म है कि भारतीय क्रिकेट भी ट्रांजिशन के दौर से गुजरने वाला है और उन्होंने उम्मीद जताई कि सीनियरों के जाने के बाद युवा जिम्मेदारी संभाल लेंगे। उन्होंने कहा, अगले एक या दो साल में युवा बल्लेबाज आएंगे जैसे गांगुली, लक्ष्मण और मैं आए थे। इसी तरह अगले 15 साल में उनकी जगह कुछ और नए बल्लेबाज आएंगे।

द्रविड़ ने उम्मीद जताई कि वह युवा खिलाडि़यों के साथ अनुभव बांट सकेंगे। उन्होंने कहा, युवा खिलाडि़यों को बातचीत करना पसंद है और मैं हमेशा इसके लिए तैयार हूं। मैं अगले सात टेस्ट तक अपना अनुभव बांट सकता हूं। यह बहुत अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य की बात है कि आजकल सीरीज से पहले क्रिकेट में अधिक अभ्यास मैच नहीं होते। मुझे याद है कि इंग्लैंड में छह या सात अभ्यास मैच होते थे। हमें तेंदुलकर, मांजरेकर और अजहर जैसे खिलाडि़यों से बहुत कुछ सीखने को मिला। द्रविड़ ने कहा, टेस्ट में हमेशा दबाव रहता है लेकिन अभ्यास मैच खुलकर खेले जा सकते हैं। द्रविड़ ने सबीना पार्क के बारे में कहा, बचपन में रेडियो पर कमेंट्री सुनते समय सबीना पार्क का जिक्र आता था। गावस्कर के शतक, वेस्टइंडीज के खतरनाक तेज गेंदबाजों के बारे में सुनकर हमने भी यहां खेलने का सपना देखा था। उन्होंने कहा, मैं यहां चार टेस्ट खेल चुका हूं और मुझे इसकी बहुत खुशी है। इसी मैदान पर वह आखिरी बार 2006 में कप्तान के तौर पर आए थे और दो अर्धशतक जमाकर 35 साल में भारत की पहली टेस्ट सीरीज जीत के सूत्रधार रहे थे। अपनी उन पारियों के बारे में उन्होंने कहा, पिच बहुत कठिन थी। उस लिहाज से वह दो पारियां बेहतरीन रही। कम स्कोर वाले मैच में कुछ भी हो सकता था। मैं उन्हें अपनी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से मानता हूं। द्रविड़ ने कहा कि विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा नहीं होने का उन्हें दुख नहीं है बल्कि वह अपने साथियों की उपलब्धि से खुश हैं। उन्होंने कहा, मुझे पता था कि मैं नहीं खेल रहा हूं। मैं पिछले ढाई साल से वनडे क्रिकेट नहीं खेल रहा हूं लिहाजा मुझे बुरा नहीं लगा। मैं अपनी टीम के लिए खुश हूं। भारतीय क्रिकेट ने इस पल का 28 साल इंतजार किया था।