17 जून 2011 - 19:30

अहलेबैत समाचार एजेंसी-अबना- की रिपोर्ट के अनुसार बहरैन के मानवाधिकार विभाग के जनरल सेक्रेटरी जनरल डाक्टर नबील रजब ने अल-आलम- न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए कहाः पिछले कुछ दिनों में आले खलीफा शासकों की ओर से मानवाधिकार की पद दलितता के संदर्भ में सामने आने वाली रिपोर्टों, वीडियो और चित्रों की संख्या पिछले तीस सालों में इस परिवार की अमानवीय करतूतों के संदर्भ में सामने आने वाली रिपोर्टों, वीडियो, चित्रों और डाकोमेन्ट्स से कहीं अधिक हैं।

अहलेबैत समाचार एजेंसी-अबना- की रिपोर्ट के अनुसार बहरैन के मानवाधिकार विभाग के जनरल सेक्रेटरी जनरल डाक्टर नबील रजब ने अल-आलम- न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए कहाः पिछले कुछ दिनों में आले खलीफा शासकों की ओर से मानवाधिकार की पद दलितता के संदर्भ में सामने आने वाली रिपोर्टों, वीडियो और चित्रों की संख्या पिछले तीस सालों में इस परिवार की अमानवीय करतूतों के संदर्भ में सामने आने वाली रिपोर्टों, वीडियो, चित्रों और डाकोमेन्ट्स से कहीं अधिक हैं।

उन्होंने कहा कि ऑले खलीफा सरकार की बर्बर नीतियों और जनता के खिलाफ उसके अमानवीय कर्मों की वजह से वैश्विक स्तर पर बहरीन की साख बुरी तरह मजरूह हो गई है. 
उन्होंने कहा बहरीन का नाम इस समय उन देशों की सूची में बताया गया है जो मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपी ठहरे हैं यहाँ तक कि अमेरिका में भी जो बहरीनी शासक परिवार को अपना शपथ धारी समझता है बहरीनी सरकार का वर्णन मानव अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सरकारों की सूची में किया है और इस सरकार को मानवाधिकार उल्लंघन का दोषी माना गया है. 
नबील रजब ने कहा: यह घटना असामान्य है क्योंकि अमेरिका में इससे पहले केवल अपने दुश्मनों को ब्लैक सूची में वर्णित किया जाता रहा है. 
उन्होंने बहरीन में आज रैलियों और प्रदर्शनों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा शासक परिवार के लिए आज की रैलियों का स्पष्ट संदेश यह है कि हिंसा, हत्या, गिरफ्तारियों, ज़ुल्म व सितम, टॉर्चर और जनता को बेरोज़गार करने जैसे सरकारी उपाय सार्वजनिक व जन आंदोलन को प्रभावित नहीं कर सके हैं इसलिए जनता बदस्तूर स्थायी, मुकतदिर और शक्तिशाली हैं और अपने अधिकारों की हर स्थिति मांग कर रही है. 
नबील रजब ने ऑल खलीफा सरकार द्वारा प्रस्तावित बातचीत की तरफ़ इशारा करते हुए कहा बहरीन में किसी ने भी ऑले खलीफा सरकार के इस प्रस्ताव को महत्व नहीं दिया है क्योंकि हत्या, अपमान और अत्याचार व जब्र के बाद अब आले खलीफा सरकार ने मक्कारी और षडयंत्र पर आधारित नीति अपना रखी है और बातचीत के बारे में उसका फैसला कदापि गंभीरता और सच्चाई पर आधारित नहीं है. 
उन्होंने कहा: यह कैसे संभव है कि हम सरकार के साथ बातचीत करें जबकि जनता जेलों में हैं, मस्जिदें शहीद की जा रही हैं, सरकारी और निजी विभागों के कर्मचारियों को बेरोजगार किया जा रहा है; लीडीज टीचर्स को पुलिस स्टेशनों में बुलाया जाता है उनसे जांच की जाती है और उन्हें हिंसा, टॉर्चर और यौन यातना का निशाना बनाया जा रहा है.