वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी.
शिवेलच ज्वालामुखी में मई 2009 से ही हलचल बढ़ गई थी और समय-समय पर इससे तीन से आठ किलोमीटर तक राख बाहर निकलती रही.
फार ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ वॉल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी के एक अधिकारी ने बताया, "बादलों की वजह से घटना की साफ तस्वीर नहीं मिल पा रही है, लेकिन हमारे भूकम्प सम्बंधी आंकड़े बताते हैं कि ज्वालामुखी की राख 10,000 मीटर तक ऊंची उठी है."
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले दो-तीन साल से ज्वालामुखीय हलचल ने ज्वालामुखी की परिधि को बदल दिया. इसका आकार 50 प्रतिशत तक बढ़ गया.
मौजूदा विस्फोट से नजदीकी प्रतिष्ठानों को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, लेकिन इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है.