बुधवार-गुरुवार की रात देश सदी के सबसे बड़े और सबसे अंधियारे चंद्रग्रहण का साक्षी बना। इस दौरान चमकीले श्वेत रंग वाला चांद सुर्ख लाल रंग में बदलता नजर आया। राजधानी दिल्ली में बादलों की वजह से चंद्रग्रहण को कायदे से नहीं देखा जा सका। लेकिन, देश के अन्य हिस्सों में लोगों ने पूनम के चांद को धीरे-धीरे पूरी तरह ओझल होते देखा।
नेहरू तारामंडल की निदेशक एन. रत्नाश्री ने बताया कि यह सदी का सबसे बड़ा और सबसे गहरा पूर्ण चंद्रग्रहण था। ऐसा अगला चंद्रग्रहण 2141 में पड़ेगा। पूर्ण चंद्रग्रहण की शुरुआत भारतीय समयानुसार रात्रि 12 बजकर 52 मिनट 30 सेकेंड पर हुई और यह दो बजकर 32 मिनट 42 सेकेंड तक चला। इस तरह पूरे 100 मिनट तक चांद आसमान से ओझल रहा। वैसे चंद्रग्रहण रात दस बजकर 54 मिनट 34 सेकेंड पर शुरू हो गया था और यह तड़के चार बजकर 30 मिनट 45 सेकेंड तक चला। इससे पहले इतना लंबा चंद्रग्रहण जुलाई, 2000 में पड़ा था। अपनी धुरी पर सूर्य की परिक्रमा कर रही पृथ्वी जब चंद्रमा और सूर्य के बीच में एक सीध में आ जाती है तो चंद्रग्रहण होता है। भारत के अलावा, पूर्वी अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया और आस्ट्रेलिया में भी यह पूर्ण चंद्रग्रहण देखा गया।
इस अवसर पर मुसलमानों ने चन्द्र ग्रहण की विशेष नमाज अदा की।