14 जून 2011 - 19:30

भारत के उदयीमान बल्लेबाज विराट कोहली ने पिछले कुछ समय से अपनी बल्लेबाजी में निरंतरता दिखाई है और इसका इनाम भी उन्हें मिला है। एकदिवसीय क्रिकेट में विराट अब भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लबाजों में गिने जाते हैं और इसीलिए सीनियर खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी में उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाजी की जिम्मेदार सौंपी गई है।

सुरैश रैना की प्रतिभा किसी से छुपी नहीं है, लेकिन जब विश्व कप में रैना और कोहली में से अंतिम ग्यारह में किसी एक को चुनने का समय आया तो टीम मैनेजमेंट ने कुछ मैचों में विराट को रैना पर ‍तरजीह दी। दिल्ली के इस होनहार कप्तान के लिए खुद को साबित करने का विश्व कप बड़ा बहुत बड़ा मौका था और उन्होंने इस मौके पर अपनी प्रतिभा के साथ न्याय भी किया। विश्व कप में विराट ने छोटी, लेकिन उपयोगी पारियां खेलीं। विराट ने विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 35 रन की प्रभावी पारी खेली।आईपीएल-4 में विराट ने अपने दमदार फॉर्म को जारी रखा और उनके इस आक्रामक रूप को देखकर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि यह उनकी बल्लेबाजी का नैसर्गिक अंदाज है। विराट वेस्टइंडीज दौरे पर वन डाउन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और इस क्रम पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। सीनियर खिलाड़ियों की मौजूदगी में विराट को मध्यक्रम में बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता हैं लेकिन पिछले उनकी शैली और आक्रमकता को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि विराट को नंबर तीन पर खेलना भेजा जाना चाहिए। हालांकि सचिन तेंडुलकर और वीरेंद्र सहवाग की सलामी जोड़ी के बाद गौतम गंभीर नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन विराट नंबर तीन के लिए टीम मैनेजमेंट के विकल्प होते सकते हैं। वेस्टइंडीज दौरे पर सीनियर खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में विराट नंबर तीन पर खुद को साबित कर रहे हैं।