6 जून 2011 - 19:30

पश्चिमी शक्तियां सीरिया के खिलाफ निंदा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पर मतदान के लिए एक कदम आगे बढ़ी हैं. सारिया में अमरीका और इज्राइल के इशारे पर कुछ शासन विरोधी तत्वों के विरूद्ध बल प्रयोग के खिलाफ फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका इस प्रस्ताव पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में मतदान के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं

फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका उस प्रस्ताव पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में मतदान के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं, जिस पर रूस और चीन वीटो करने के लिए बाध्य हो सकते हैं और उन्हें शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है.

फ्रांस के विदेश मंत्री एलेन जुप्पे ने कहा, 'मुझे लगता है प्रस्ताव के पक्ष में 11 मत पड़ने की संभावना है और हम देखते हैं कि रूस क्या करता है.’

सुरक्षा परिषद के राजनयिकों की विशेषज्ञ स्तरीय वार्ता में रूस और चीन ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया.

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ली बाओदोंग ने कहा, 'सीरिया की स्थिति को लेकर हम चिंतित हैं लेकिन हमें नहीं लगता कि परिषद को शामिल करने से वहां की स्थिति में कोई मदद मिलेगी.’

जबकि बहरैन में हो रहे अत्याचारों और नरसंहार को अमरीका और पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है और यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों का इन देशों के साथ होने के बावजूद उन देशों की जनता में अमरीका और पश्चिमी देशों के विरूद्ध आक्रोश पाया जाता है

परिषद के स्थायी सदस्यों रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका और चीन के पास किसी भी प्रस्ताव पर वीटो करने का अधिकार है.
ज्ञात रहे ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदी निजाद इस अधिकार को दूसरे राष्ट्रों का अपमान और इसे सवतंत्रा व मानवता के विरूद्ध बताते रहे है जिसका दुनिया के अधिकांश लोगों ने भव्य स्वागत किया है।