मनामा: बहरीन में शिया धर्मगुरुओं के खिलाफ चल रहे एक बड़े मुकदमे पर आज, रविवार 8 नवंबर 2026 को फैसला सुनाया जा सकता है। इस मामले में कुल 69 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 60 शिया धर्मगुरु शामिल हैं। इस मुकदमे को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि इस मामले में आरोपियों को प्रताड़ित किया गया और उनसे जबरन कबूलनामे लिए गए।
जानकारी के मुताबिक, 69 आरोपियों में से 56 लोग जेल में बंद हैं, जबकि 13 धर्मगुरुओं पर उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अदालत इन लोगों को कड़ी सजा सुना सकती है।
बहरीन सरकार का आरोप है कि इन लोगों ने एक आतंकवादी संगठन बनाया था और देश की राजनीतिक व्यवस्था को गिराने की साजिश रची थी। सरकार का यह भी दावा है कि आरोपियों ने मस्जिदों और धार्मिक सभाओं का इस्तेमाल विलायत-ए-फकीह की विचारधारा फैलाने के लिए किया।
हालांकि, आरोपियों के परिवारों और वकीलों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सरकार धार्मिक गतिविधियों को सुरक्षा का मुद्दा बनाकर शिया धर्मगुरुओं को निशाना बना रही है।
बहरीन के प्रमुख शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम ने मुकदमे से पहले बयान जारी कर लोगों से गिरफ्तार धर्मगुरुओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से उनका समर्थन करने पर जोर दिया।
ह्यूमन राइट्स वॉच और विश्व यातना विरोधी संगठन समेत 20 अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर मुकदमे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यातना और जबरन कबूलनामे के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
इस मामले में अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है और दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य संबंध हैं। आलोचकों का कहना है कि मानवाधिकारों की बात करने वाला अमेरिका बहरीन सरकार को लगातार समर्थन देकर दोहरे मापदंड अपना रहा है।
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