27 अक्टूबर 2026 - 19:02
ज़ायोनी अधिकारी का दावा, ईरान के खिलाफ इस्राईल अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता

इस्राईल की अगली सरकार को आगामी चुनावों के नतीजे चाहे जो भी हों, ईरान के प्रति अपनी रणनीति में पूरी तरह बदलाव करना पड़ेगा।

तल अवीव: इस्राईल के एक सुरक्षा अधिकारी और विशेषज्ञ का कहना है कि ईरान के खिलाफ दो युद्धों के बाद भी इस्राईल अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सका है। ऐसे में भविष्य में और अधिक सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने के बावजूद उसके लिए अपने लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।

ईरान से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ और इस्राईल के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान में ईरान कार्यक्रम के निदेशक रज़ ज़िमत ने हिब्रू अखबार येदिओत अहारोनोत में प्रकाशित अपने लेख में यह बात कही है।

उन्होंने कहा कि इस्राईल की अगली सरकार को आगामी चुनावों के नतीजे चाहे जो भी हों, ईरान के प्रति अपनी रणनीति में पूरी तरह बदलाव करना पड़ेगा।

ज़िमत के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा स्थिति, जिसमें न पूरी तरह युद्ध है और न शांति, बहुत अस्थिर है। दोबारा सैन्य संघर्ष शुरू होने से भी किसी वास्तविक समाधान की गारंटी नहीं मिल सकती।

उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध में इस्राईल ईरान की सरकार को गिराने में नाकाम रहा। इसके उलट, युद्ध के दौरान हुए घटनाक्रम से ईरान के भीतर उसकी सरकार की स्थिति और मजबूत हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की आर्थिक चुनौतियों से ऐसी बगावत होने की संभावना नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप सरकार गिर जाए। युद्ध के हालात ने ईरान में राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत किया और लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के नीचे एकजुट किया।

इस्राईली विशेषज्ञ ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी गलतफहमियों से बाहर निकलने की जरूरत है। उनके मुताबिक, ईरान के पास सैकड़ों किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम, आधुनिक सेंट्रीफ्यूज और अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए मजबूत भूमिगत ढांचा मौजूद है।

उन्होंने आगे कहा कि हालिया युद्धों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की इच्छा और मजबूत हुई है।

ज़िमत के अनुसार, इस्राईल की अगली सरकार को ईरान के खिलाफ ऐसी नई रणनीति बनानी चाहिए, जो गलत उम्मीदों और अवास्तविक धारणाओं के बजाय पिछले युद्धों की सफलताओं और नाकामियों के वास्तविक आकलन पर आधारित हो।

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