संयुक्त राष्ट्र: ईरान और 11 अन्य देशों ने परमाणु ठिकानों पर हर तरह के हमले और हमले की धमकी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। इन देशों ने कहा कि सभी देशों को बिना किसी भेदभाव के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने और उसका इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति के 81वें सत्र के दौरान ईरान, रूस, चीन, बेलारूस, बुर्किना फासो, क्यूबा, इरिट्रिया, निकारागुआ, नाइजर, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और जिम्बाब्वे ने संयुक्त बयान पढ़ा। इसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी व्यवस्था के तहत आने वाले परमाणु ठिकानों पर हमलों और हमले की धमकियों को रोकने पर जोर दिया गया।
बयान में कहा गया कि परमाणु ठिकानों पर हमला करना या हमले की धमकी देना संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के नियमों के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के संबंधित प्रस्तावों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से परमाणु सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही, इससे अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की वैश्विक व्यवस्था भी कमजोर हो सकती है।
संयुक्त बयान में जोर देकर कहा गया कि किसी भी परिस्थिति में परमाणु ठिकानों को हमले या हमले की धमकी का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। बयान के अनुसार, ऐसे हमलों पर चुप्पी साधने से अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर होंगे और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई को सामान्य मानने का खतरा बढ़ेगा।
बयान में सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की गई कि वे परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह के हमले और हमले की धमकी का स्पष्ट और दृढ़ विरोध करें। साथ ही, परमाणु सुरक्षा मजबूत करने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के अधिकार की रक्षा के लिए मिलकर काम करें।
आपकी टिप्पणी