अबना समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ज़्ज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय ने रविवार को युद्ध में मारे गए फिलिस्तीनी बच्चों के आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान अब तक 21,976 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें एक साल से कम उम्र के 1,125 बच्चे शामिल हैं। वहीं, युद्ध के दौरान जन्म लेने वाले 612 नवजात बच्चों की भी मौत हो गई।
ग़ज़्ज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय ने कहा कि युद्ध में मारे गए लोगों में 55 प्रतिशत से अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं। कार्यालय ने इन आंकड़ों को फिलिस्तीनी समाज की एक पूरी पीढ़ी के तबाह होने का संकेत बताया और इसके लिए इस्राईली सेना के हमलों को जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ज़्ज़ा में युद्ध के दौरान 22,000 विद्यार्थी मारे गए हैं, जबकि स्कूल जाने की उम्र के करीब 6.5 लाख बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए हैं।
इसके अलावा, ग़ज़्ज़ा में अनाथ बच्चों की संख्या बढ़कर 62,247 हो गई है। इनमें 2,774 बच्चे अपने माता-पिता दोनों को खो चुके हैं, जबकि 8,394 बच्चों ने अपनी मां को खो दिया है।
ग़ज़्ज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय ने चेतावनी दी है कि करीब 6.5 लाख बच्चों पर भूख और कुपोषण के कारण मौत का खतरा मंडरा रहा है। इनमें 40,000 नवजात बच्चे शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ज़्ज़ा में 164 बच्चों की मौत भूख के कारण हुई, जबकि 28 बच्चों ने भीषण ठंड के चलते दम तोड़ दिया। इनमें से 25 बच्चों की मौत विस्थापित लोगों के शिविरों में हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़्ज़ा में 5,400 से अधिक लोगों के अंग काटने पड़े हैं, जिनमें 18 प्रतिशत बच्चे हैं।
इसके अलावा 5,200 बीमार बच्चों को इलाज के लिए तत्काल ग़ज़्ज़ा से बाहर ले जाने की जरूरत है। 5,803 बीमार बच्चे इलाज के इंतजार में हैं। 2,432 बच्चे डायबिटीज से पीड़ित हैं। 12,000 से अधिक गर्भपात के मामले दर्ज किए गए हैं।
ग़ज़्ज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय ने कहा कि ये आंकड़े युद्ध के बच्चों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को दिखाते हैं। ये आंकड़े कार्यालय की ओर से जारी किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
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