अबना अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बहरैन की अल-विफाक नेशनल इस्लामिक सोसाइटी के उप महासचिव शेख हुसैन अल-दिही ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से लेकर सितंबर 2026 के मध्य तक 820 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 62 उलमा शामिल हैं।
शेख हुसैन अल-दिही ने ‘मावराउल-क़ुयूद’ नाम की रिपोर्ट जारी करने के दौरान यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, गिरफ्तार किए गए 62 उलमा में से 60 बहरैन में और दो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में गिरफ्तार किए गए हैं।
अल-दिही ने कहा कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों पर विदेशी समूहों से संबंध, आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, उनके मुताबिक, कुछ मामलों में सबूत के तौर पर धार्मिक भाषणों, जुमे और जमात की नमाज के खुत्बों, किताबों और धार्मिक लेखों का हवाला दिया गया है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं और गतिविधियों को आपराधिक मामलों से अलग रखा जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को भरोसेमंद सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर साबित किया जाना चाहिए।
अल-दिही ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आरोपियों को वकील तक पहुंचने में परेशानी हुई, आरोप स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए और दबाव व धमकी के जरिए बयान लिए गए। उन्होंने उलमा की गिरफ्तारी, पूछताछ और मुकदमों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
उन्होंने बहरैन के नागरिकों की जानकारी इस्राईल को दिए जाने का भी आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने मनामा की सुरक्षा नीतियों और इस्राईल के साथ सुरक्षा सहयोग पर चिंता जताई।
अल-दिही ने शिया समुदाय की धार्मिक संस्थाओं और वक्फ संपत्तियों पर दबाव डालने तथा धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदियां लगाने की आलोचना की। उन्होंने गिरफ्तार उलमा को तुरंत रिहा करने, धार्मिक गतिविधियों पर लगी पाबंदियां हटाने और कथित दबाव में लिए गए बयानों को अमान्य घोषित करने की मांग की।
‘मावराउल-क़ुयूद’ रिपोर्ट में गिरफ्तारियों की संख्या, लगाए गए आरोपों, जांच की प्रक्रिया, आरोपियों के कानूनी अधिकारों और हिरासत की परिस्थितियों की समीक्षा की गई है।
अल-विफाक ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों, मानवाधिकार संस्थाओं और मीडिया से रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की जांच करने की अपील की है।
आपकी टिप्पणी