प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में इस देश की मोदी सरकार द्वारा बनाए गए विवादित नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ 47 दिनों से दिल्ली की सभी सीमाओं पर आंदोलन पर बैठके भारतीय किसानों ने गुरुवार को विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला।
दावा किया जा रहा है कि किसानों के इस ट्रैक्टर मार्च में लगभग 60 हज़ार ट्रैक्टरों ने भाग लिया है। किसानों के ट्रैक्टर मार्च को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया है। याद रहे कि किसान पहले यह मार्च बुधवार को ही निकालने वाले थे, लेकिन मौसम को देखते हुए इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया।
किसानों ने कहा है कि यह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर आयोजित किए जाने वाले ट्रैक्टर मार्च का पूर्वाभ्यास है।

इस बीच किसान आंदोलन में कोविड-19 को लेकर भारत की सर्वोच्च अदालत ने चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा है कि किसान आंदोलन में कोविड-19 को लेकर क्या नियमों का पालन किया जा सकता है?
भारत की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायधीश बोबडे ने कहा कि 'हमें नहीं पता कि किसान कोविड-19 से सुरक्षित हैं या नहीं? अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो तबलीग़ी जमात की तरह समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि, पहले तबलीग़ी जमा हुए फिर अब किसान जमा हो गए, मुझे नहीं पता कि किसानों को कोविड-19 से प्रोटेक्शन है क्या? हमें मुख्य समस्या पर बात करनी होगी।' सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने मोदी सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि किसान आंदोलन में कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो।
मोदी सरकार की ओर पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वहां कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि, सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी निज़ामुद्दीन मरकज़ में जमातियों के जुटने की सीबीआई जांच की याचिका पर सुनवाई के दौरान की है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि मोहम्मद साद को गिरफ़्तार नहीं किया गया है। मोदी सरकार ने कहा कि वह दो हफ्ते में जवाब दाख़िल करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को वक़्त दे दिया है।