सईद ख़तीबज़ादे ने तेहरान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व प्रतिबद्धताओं पर अमल का ज़िक्र करते हुए बल दिया कि ईरान परमाणु व मीज़ाईल प्रोग्राम और रक्षा नीति में किसी तरह के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने बुधवार को फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद की शिखर बैठक के अंत में जारी बयान में, लगाए गए निराधार आरोप की निंदा करते हुए कहा कि इस परिषद पर सऊदी शासन के राजनैतिक दबाव और स्थिति की सही समझ न होने की वजह से इस तरह का आरोप लगाया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी शासन की क्षेत्रीय नीतियों और इस्लामी गणतंत्र ईरान और दूसरे देशों के बारे में उसके विध्वंसक रवैये की वजह से पड़ोसी देशों की संपत्ति का बड़ा भाग बर्बाद हुआ और क्षेत्र पश्चिमी कंपनियों के हथियारों का भंडार बन गया।
सईद ख़तीबज़ादे ने ज़ायोनी शासन के साथ कुछ अरब देशों के संबंध सामान्य होने का ज़िक्र करते हुए कहा कि सऊदी शासन और दूसरे देशों के मामले में हस्तक्षेप करने वाले देश, जिनकी वजह से यमन में बेगुनाहों का नरसंहार हो रहा और क्षेत्र में अशांति और आतंकवाद का विस्तार हुआ है, मानवाधिकार के ख़िलाफ़ अपने अपराधों पर पर्दा डालने और अंतर्राष्ट्रीय दंड से बचने के लिए दूसरों के सिर निराधार अपराध मढ़ने की कोशिश में हैं।
सईद ख़तीबज़ादे ने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ अमरीकी शासन के आर्थिक आतंकवाद को फ़ार्स खाड़ी के कुछ देशों की ओर से खुले समर्थन की भर्त्सना की और इसे पड़ोसी के साथ अच्छे व्यवहार की नीति के ख़िलाफ़ बताया।
इसी तरह उन्होंने तीन ईरानी द्वीप बू मूसा, तुंबे बुज़ुर्ग और तुंबे कूचक को इस्लामी गंणतंत्र का हमेशा से अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र इन द्वीपों के बारे में किसी तरह के दावे को अपने आंतरिक मामलों व क्षेत्रीय अखंडता में हस्तक्षेप मानता है।