ईरान के विदेशमंत्री ने कहा है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत का तरीक़ा ट्रंप के दुर्भाग्य का सूचक है। विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि अमेरिका के आतंकवादी हवाई हमले में जिस तरह जनरल क़ासिम सुलैमानी को शहीद किया गया वह ट्रंप की अत्यंत तुच्छता का परिचायक है कि उन्होंने आतंकवाद के महानायक को इस प्रकार शहीद किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी, शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी से डरते थे और उन्हें रणक्षेत्र का महायोद्धा समझते थे। विदेशमंत्री ने कहा कि शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी वास्तव में रणक्षेत्र के महायोद्धा व शूरवीर थे और इसी वजह से उन्होंने इराक और सीरिया में अमेरिकियों को पराजय का कटु स्वाद चखाया। इसी प्रकार विदेशमंत्री ने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में भी शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी दक्ष थे और वह केवल आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के महानायक नहीं थे बल्कि शांति के शूरवीर और संघर्षकर्ता भी थे।
ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की व्यक्तिगत विशेषताओं की ओर संकेत करते हुए कहा कि हम उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते थे जिनके लिए एक इंसान का खून, लोगों की इज़्ज़त और लड़ाई का समाप्त होना महत्वपूर्ण था और जो भी शांति की योजना तैयार होती थी उसके योजनाकार शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी होते थे।
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित करने के संबंध में बोन में जो कांफ्रेन्स हुई थी उसे सफल बनाने में शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की महमत्वपूर्ण भूमिका थी। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने जब यमन के खिलाफ युद्ध आरंभ कर दिया था तो ईरान के विदेशमंत्रालय ने जनरल सुलैमानी की मदद से युद्ध विराम का प्रस्ताव दिया था।
विदेशमंत्री ने यमन में शांति स्थापित करने में सऊदी अरब के विरोध की ओर संकेत किया और कहा कि यमन के खिलाफ जब सऊदी अरब ने पाश्विक हमला आरंभ किया था तब अमेरिका के तत्कालीन विदेशमंत्री जॉन केरी ने कहा था कि सऊदी अरब यह समझता है कि तीन सप्ताह में जंग जीत लेगा परंतु वह तीन सप्ताह अब पांच साल हो चुका है।