ईरान के बेहद ताक़तवर जनरल क़ासिम सुलैमानी की बरसी है जिन्हें उनके साथी और इराकी स्वंय सेवी बल हश्दुश्शाबी के डिप्टी कमांडर अबू मेहदी अलमुहंदिस के साथ पिछले साल शहीद कर दिया गया था। इसी मध्य नये साल के जश्न का सिलसिला भी खत्म हो गया है जिसके बाद ईरान और दूसरी तरफ अमरीका व इस्राईल की धमकियों को लागू करने और ट्रम्प की सत्ता काल के बचे दो हफ्तों के दौरान युद्ध के पलीते में आग लगाने का माहौल तैयार किया जा रहा है अलबत्ता अगर ईरान के खिलाफ युद्ध की अमरीकी योजना होगी तब।

बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अपनी धमकियों के बावजूद, युद्ध आरंभ नहीं करेगा भले की आईआरजीसी के कमांडर जनरल सलामी और कुद्स ब्रिगेड के कमांडन जनरल क़ाआनी ने धमकी पर आधारित बयान दिया हो बल्कि हालात का सही आकंलन, ईरानी विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ के उस ट्वीट से होता है जिसमें उन्होंने कहा है कि ट्रम्प ईरान पर हमले का बहाना ढूंढ रहे हैं।
जब बगदाद के एयरपोर्ट के निकट जनरल क़ासिम सुलैमानी पर हमला किया गया था तो उस समय आदिल अब्दुल मेहदी इराक के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने तीन दिन पहले अलमयादीन टीवी चैनल से वार्ता में एक बेहद खतरनाक राज़ से पर्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि जनरल सुलैमानी की हत्या से तीन दिन पहले ट्रम्प ने उनसे संपर्क करके ईरान और अमरीका के बीच मध्यस्थता करने की मांग की थी और ईरान के साथ तनाव कम करने में अमरीका की रूचि प्रकट की थी जिसके बाद उन्होंने जनरल सुलैमानी को इराक बुलाया था ताकि ट्रम्प का यह संदेश उन तक पहुंचाया जाए और उसका जवाब लिया जाए जाहिर है इस दशा में अमरीका की ओर से उनपर हमले की कोई आशंका ही नहीं थी।
दर अस्ल आदिल अब्दुलमेहदी ने इशारों में यह कहा है कि ट्रम्प ने अपनी आदत के अनुसार झूठ बोला था और इस टेलीफोनी वार्ता और ईरान व अमरीका के बीच मध्यस्थता की मांग को जनरल सुलैमानी को फंसाने का साधन बनाया था और इस साज़िश में इराक़ में अमरीकी एजेन्टों ने भी सहयोग किया। योजना यह थी कि अगर ईरान ने इस कार्यवाही का जवाब दिया तो उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया जाए।

मैं पश्चिम में 40 वर्षों से रह रहा हूं , इस दौरान हमने जो सीखा है वह यह है कि पश्चिम के सुरक्षा और सैन्य अधिकारी किसी भी कार्यवाही का जल्दबाज़ी में फैसला नहीं करते बल्कि युद्धों और हत्याओं के लिए धीमी आंच पर योजनाएं पकायी जाती हैं और बारीकी के साथ तैयारी की जाती है जैसा कि इराक़ पर अमरीकी हमले और उस पर क़ब्ज़े की योजना, हमले से चार बरस पहले से तैयार थी इसी तरह जनरल क़ासिम सुलैमानी और ईरान के एक वैज्ञानिक, मोहसिन फख्रीज़ादे के बारे में भी यही कहा जाता है।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने शनिवार के अपने संस्करण में लिखा है कि ईरान ने परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी को यह बताया है कि वह यूरेनियम का 20 प्रतिशत संवर्धन आरंभ कर रहा है और यह सूचना, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही और उसके परमाणु प्रतिष्ठानों को तबाह करने के लिए ट्रम्प को बहाना दे सकती है।
अमरीकी राष्ट्रपति के पास यदि ईरान पर हमले की योजना होगी तो इसके लिए उन्हें किसी बहाने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनके पूर्ववर्ती रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इराक़ पर हमले और उस पर क़ब्ज़े की जब योजना लागू करना चाही तो " बहाना" तराश लिया इसके लिए उन्होंने अपने विदेशमंत्री कोलिन पावेल को जाली दस्तावेज़ों के साथ, सुरक्षा परिषद में भेजा जहां इराक़ में भारी तबाही फैलाने वाले हथियारों की उपस्थिति का झूठा दावा किया गया और इसके लिए एक इराक़ी विशेषज्ञ को गवाह बनाया गया जिसे जर्मनी में शरण देकर उसकी सेवा का इनाम दिया गया।
आज कल जिन हालात में हम जीवन गुज़ार रहे हैं वह वास्तव में युद्ध के हालात हैं, रिपोर्टों के बताया गया है कि ईरान में हाई अलर्ट है, इसी तरह परशियन गल्फ में अमरीकी छावनियों विशेषकर उसकी सब से बड़ी " छावनी" इस्राईल में भी हाई अलर्ट है। हिज़्बुल्लाह से निकट एक लेबनानी सूत्र ने भी बताया है कि हिज़्बुल्लाह पूरी तरह से अलर्ट है जो वास्तव में सैयद हसन नसरुल्लाह की हत्या की किसी कोशिश से मुकाबला और संभावित युद्ध में भाग लेने के लिए तैयारी की वजह से है जो ईरान पर अमरीका व इस्राईल की किसी सैन्य कार्यवाही के जवाब में शुरु होगा और जिसके बाद इस्राईल पर दसियों हज़ार मिसाइल बरसाए जाएंगे और अलजलील या अन्य नगरों पर हिज़्बुल्लाह क़ब्ज़ा करने की कोशिश करेगा।
कुछ लोगों का कहना है कि अमरीका ने परशियन गल्फ से अपने विमानवाहक पोत नीमिट्ज़ को जो हटाने का फैसला किया है वह तनाव कम करने के लिए नहीं बल्कि इस लिए है क्योंकि ईरान की मिसाइलें कुछ ही घंटों में उसे पूरी तरह से तबाह कर सकती हैं।
हमें सैन्य मामलों के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है लेकिन सैन्य विशेषज्ञों और इस बारे मे जारी होने वाली रिपोर्टों से जो पता चलता है उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि ईरान, राडारों से बचने वाली और पेट्रियोट एन्टी मिसाइल सिस्टम को भी चकमा देने की क्षमता रखने वाली अपनी बैलिस्टिक और हाइपर सोनिक मिसाइलों से बड़ा भयानक और मज़बूत जवाब देगा। बेहद सटीक निशाना लगाने वाले इन मिसाइलों की विनाशलीला का प्रदर्शन यमन के हौसियों सऊदी तेल कंपनी आरामको के जद्दा स्थित तेल प्रतिष्ठान पर हमला करके किया था। दूसरी बात यह है कि कुम के निकट ईरान का फोर्दू परमाणु प्रतिष्ठान जहां ईरान की अधिकांश परमाणु गतिविधियां केन्द्रित हैं, पहाड़ों के बीच और ज़मीन की गहरायी मे बनाया गया है जिसे नुकसान पहुंचाना बेहद कठिन है।
अगर 2020 कोरोना का साल रहा है तो निश्चित रूप से नया साल युद्धों का साल हो सकता है जिसमें कोरोना का फैलाव भी जारी रहेगा इस लिए यह साल अधिकि खतरनाक है।