यूएई और बहरैन के साम इस्राईल के संबंधों के बाद फार्स की खाड़ी में उसकी उपस्थिति ईरान की चिंता की एक वजह है। तेहरान और तेलअबीब एक दूसरे को धमकियां दे रहे हैं।
हालिया दिनों में अमरीका ने बी-52 बमवर्षक विमान परशियन गल्फ में भेजे जिसे ईरान के सामने शक्ति प्रदर्शन और ईरान को अपने परमाणु वैज्ञानिक की हत्या का जवाब देने से रोकने की कोशिश बताया जा रहा है।
इसी तरह अमरीका ने दिसंबर 2020 में बताया था कि उसकी एक पनडुब्बी और दो युद्धपोत परशियन गल्फ भेज दिये गये हैं, इसी दौरान एक इस्राईली पनडुब्बी भी परशियल गल्फ के लिए जाते समय स्वेज़ नहर से गुज़री। इसी मध्य यह भी खबर आयी कि इस्राईली अधिकारी, ईरान के खतरे पर चर्चा के लिए बैठक कर रहे हैं।
ईरानी और अमरीकी दोनों को ही, खांई के मुहाने की नीति के बारे में पता है, यह कहना है इराक़ी विशेषज्ञ अयाद अद्दैलमी का।
उन्होंने कहा कि पिछले कई बरसों में ईरान और अमरीका के बीच तनाव कई बार अपने चरम तक पहुंचा है लेकिन हर कार अंत में दोनों पक्षों में अघोषित युद्ध विराम हो गया।

वाशिंग्टन और तेहरान को, टकराव के बिना तनाव को चरम तक पहुंचाने से फायदा होगा लेकिन हो सकता है कि इस बार ईरान व अमरीका के बीच धमकियों के मध्य इस्राईल भी एक पक्ष बन जाए।
संवेदनशील मुद्दा, अपने अरब दोस्तों विशेषकर यूएई की मदद से परशियन गल्फ में इस्राईल की उपस्थित है। इस्राईल यूएई में एक सैन्य छावनी बनाने की कोशिश कर सकता है।
ईरानी अधिकारी, इस्राईल पर यह आरोप लगाते हैं कि वह इलाक़े को बड़े तनाव की तरफ ले जा रहा है और इसके साथ ही वह धमकी देते हैं कि ज़ायोनियों को करारा जवाब दिया जाएगा।
अद्दैलमी के अनुसार ईरान वर्तमान समय में बहुत सोची समझी नीति पर काम कर रहा है और बड़ी चतुराई से बाइडन के सत्ताकाल का संयम के साथ इंतेज़ार कर रहा है।

इस्राईली सेना ने शुक्रवार को बताया है कि वह ईरान पर कड़ी नज़र रखे है और उसे डर है कि इराक़ और यमन से उस पर वार किया जा सकता है। हालांकि बगदाद मे अमरीकी दूतावास पर हमले के बाद सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गयी है क्योंकि यह कहा जा रहा है कि इस हमले के पीछे तेहरान का हाथ है और जिस राकेटों से फायर किया गया है वह ईरान में बने थे।
दैलमी का कहना है कि ईरान ने इस आरोप का पारदर्शी रुख अपनाते हुए खुल कर कहा है कि इस हमले के पीछे उनका हाथ नहीं है, इस लिए इस बात की संभावना नहीं है कि वर्तमान समय में ईरान, टकराव चाहता हो बल्कि उसका मक़सद अमरीका और इस्राईल के सामने यह साबित करना है कि वह अपने परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी की दशा में प्रभावशाली जवाब देने की क्षमता रखता है।
परशियन गल्फ के बारे में दैलमी का कहना है कि तेहरान फार्स की खाड़ी के अरब देशों को अपने दुश्मनों में सब से कमज़ोर समझता है इसी लिए उन्हें धमकाने में ज़रा भी संकोच नहीं करता क्योंकि उसे लगता है कि यह देश, अमरीका और इस्राईल पर लगाम कस सकते हैं।